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मोहाली में इंडस्ट्री को झटका, सारी उम्मीदें धराशायी

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मोहाली। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से मंगलवार को लोकसभा में पेश किए बजट में मोहाली इंडस्ट्री को राहत के बदले झटका लगा है। उद्योगपति पूरे बजट भाषण के अंदर राहत की खबर सुनने का इंतजार करते रहे, लेकिन अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगी। मोहाली की अधिकतर इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा रेल लिंक की जरूरत है, जिससे इंडस्ट्री में तैयार सामान को विदेश में जल्द बेचकर मुनाफा कमा सकें। इस पर उद्योगपति और इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान अनुराग अग्रवाल ने बताया कि मेटल की पहले ही अपने देश में मोनोपली हो रखी है, इसलिए हमें विदेश से मेटल आयात करते हैं। हालत ऐसे हैं कि विदेश से मेटल आयात करने के ऊपर भारी टैक्स अदा करना पड़ता है। लगातार महंगे होते स्टील से उद्योगपतियों को केंद्र सरकार के आम बजट में राहत की उम्मीद थी, जो नहीं मिली। जबकि एमएसएमई इंडस्ट्री पिछले दो साल से कोविड काल के चलते आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। इनकी हालत को देखते हुए केंद्र सरकार को अपने बजट के अंदर टैक्स में छूट प्रदान करनी चाहिए थी। इसी तरह, एमएसएमई को लेकर इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को 2023 तक बढ़ाने का जो निर्णय लिया गया है वह सराहनीय है। लेकिन इसकी नीतियां एमएसएमई इंडस्ट्री के लिए न होकर बड़े उद्योगपति के लिए कारगर साबित होती हैं। जबकि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम की शर्तें एमएसएमई इंडस्ट्री पूरा करने में सक्षम नहीं और इसका फायदा बड़े इंडस्ट्री को ही मिलता है।
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उद्योगपति और इंडस्ट्री एसोसिएशन महासचिव राजीव गुप्ता बताते हैं। पिछले दो साल से कोविड काल में इंडस्ट्री की जो हालत है, इसमें सरकार को अपने बजट के अंदर जीएसटी छूट का प्रावधान किया जाना चाहिए था। इसके अलावा विदेश से मंगवाए जाने वाले रॉ मैटीरियल के लिए लगाई जाने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को खत्म करना चाहिए था। जबकि एमएसएमई इंडस्ट्री की हालत को देखते हुए उनके ऊपर बकाया टैक्स को माफ कर देना चाहिए था।
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