संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। पिछले हफ्ते अदालत की ओर से एसटीपी निर्माण पर लगाए गए स्टे को हटाने के कारण अब इसके लगने का रास्ता साफ हो गया है। अब यहां कम से कम 35 एमएलडी की क्षमता का एसटीपी लगाने पर विचार किया जा रहा है, जबकि पहले यहां पर 22.5 एमएलडी की क्षमता का एसटीपी लगाया जाना था। यहां पर एसटीपी लगाने से बलटाना, ढकोली, पीरमुछल्ला, सनौली, किशनपुरा अधिक क्षेत्रों को फायदा होगा।
जीरकपुर में पहले आबादी के हिसाब से गांव सिंहपुरा में 17.3 एमएलडी का एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था जो कि करीब एक लाख की आबादी के लिए काफी था। शहर की निरंतर बढ़ती जा रही आबादी के चलते पहले वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट कम पड़ गया तो शहर में एक और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग उठने लगी।
नगर परिषद की ओर से सनौली क्षेत्र में एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना बनाई तथा उसके लिए सारी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इसके बाद वहां पर आसपास की दर्जनों सोसाइटियों के लोगों ने इस क्षेत्र में लगने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का विरोध शुरू कर दिया। लोगों ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए इस एसटीपी पर अदालत से स्टे लगवा दिया। जिसके कारण यहां पर लगने वाले एसटीपी का काम अधर में लटक गया। पिछले हफ्ते अदालत द्वारा इस एसटीपी पर लगाई गई रोक को हटाने से अब इसके लिए रास्ता साफ हो गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर परिषद की ओर से इस क्षेत्र में अपने स्तर पर एक सर्वे करवाया गया था जिससे पता चला कि ढकोली, पीरमुछल्ला तथा बलटाना क्षेत्र में करीब 3 करोड़ की आबादी हो गई है। इतनी बड़ी आबादी के लिए कम से कम 35 एमएलडी की क्षमता का एसटीपी लगाने पर विचार किया जा रहा है, जबकि पहले यहां पर 22.5 एमएलडी की क्षमता का एसटीपी लगाया जाना था। यहां पर एसटीपी लगाने से बलटाना, ढकोली, पीरमुछल्ला, सनौली, किशनपुरा अधिक क्षेत्रों को फायदा होगा।
एसटीपी लगाने के लिए प्रोजेक्ट को दोबारा डिजाइन किया जाएगा तथा उसके हिसाब से ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके लिए करीब 6 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद एसटीपी लगाने और सीवरेज लाइन डालने के लिए ठेकेदार को करीब 1 साल का समय दिया जा सकता है। इससे सीधा-सीधा अनुमान लगाया जा रहा है कि सनौली क्षेत्र में लगने वाले एसटीपी का काम पूरा होने में करीब डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है।