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Mohali News: एसबीआई बैंक के अलग-अलग एटीएम से निकाले 41.94 लाख, पांच साल बाद मामला दर्ज

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मोहाली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की स्पेशलाइज्ड करेंसी एडमिनिस्ट्रेशन ब्रांच (एससीएबी) सेक्टर-68 मोहाली में सामने आए करीब 41.94 लाख रुपये की एटीएम धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने पांच साल बाद कार्रवाई की। अदालत के सख्त रुख के बाद आखिरकार स्टेट साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।
यह मामला वर्ष 2 नवंबर 2019 से 10 फरवरी 2020 के बीच विभिन्न एटीएम से संदिग्ध तरीके से की गई नकदी निकासी से जुड़ा है। बैंक के तत्कालीन चीफ मैनेजर संजय सेठ द्वारा उस समय के एसएसपी मोहाली को कई बार शिकायतें दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर बैंक को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
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बैंक ने एसएसपी मोहाली को 12 फरवरी 2020 को शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद बैंक की ओर से लगातार कई रिमाइंडर 18 फरवरी, 18 मार्च, 19 जून, 17 अगस्त, 27 अक्टूबर, 10 नवंबर और 4 दिसंबर 2020 भेजे गए। बैंक अधिकारियों ने साइबर क्राइम कार्यालय में बयान भी दर्ज करवाए, परंतु पुलिस द्वारा जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। इस पर बैंक ने अदालत में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत आवेदन दायर किया। शुरुआती स्तर पर आवेदन को शिकायत मानकर सबूतों के लिए भेज दिया गया था, लेकिन बाद में सत्र अदालत ने इस आदेश को रद्द कर पुन: विचार करने के निर्देश दिए।

एडिशनल चीफ ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट अनिश गोयल ने अपने आदेश में कहा कि बैंक एक सरकारी संस्था है और जनता के धन की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है। यदि बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई है और आरोपी अज्ञात हैं, तो विस्तृत जांच केवल एफआईआर दर्ज होने के बाद ही संभव है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होना पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज न करने का आधार नहीं हो सकता। एटीएम के मैकेनिज्म और धोखाधड़ी की पूरी कार्यप्रणाली की जांच साइबर पुलिस ही कर सकती है।
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साइबर क्राइम थाना को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2025 को आदेश जारी करते हुए बीएनएस की धारा 318(4) एवं 341(1) (पूर्व में आईपीसी की धारा 420 एवं 475) के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा। आदेश की कॉपी साइबर क्राइम थाना को भेजी गई। अदालत के आदेश का पालन करते हुए अब साइबर क्राइम थाना मोहाली ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और एफआईआर की कॉपी इलाका मजिस्ट्रेट व वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई हैं। इस मामले में अब पुलिस तकनीकी एवं वित्तीय रिकॉर्डों की सहायता से आरोपियों का पता लगाने में जुट गई है।
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