जीरकपुर। शहर में इन दिनों संरक्षित पशुओं का आतंक है। ये मुख्य सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में खुलेआम घूम रहे हैं। पशु न केवल ट्रैफिक व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं, बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ट्रैफिक पुलिस को भी इस मामले में नगर परिषद से हस्तक्षेप की अपील करनी पड़ी। पुलिस ने संरक्षित पशुओं को हटाने के लिए नगर परिषद को 30 मार्च 2026 को एक पत्र भी लिखा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासियों कृष्ण कुमार, हरपाल सिंह, पुनीत कुमार, सरोज, दीपक कुमार, सतपाल, सौरभ अग्रवाल का कहना है कि सड़कों पर बैठे सांड़ अचानक आक्रामक हो जाते हैं।
इससे बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे कई छोटे-बड़े हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें लोग घायल भी हुए हैं। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि यदि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए, तो पशुओं के खुले घूमने के पीछे की लापरवाही और जिम्मेदारियों की अनदेखी उजागर हो सकती है। लोगों का यह भी कहना है कि नगर परिषद सिर्फ दावे करती है कि वह पशुओं को पकड़कर गोशाला छोड़कर आती है, लेकिन इस बात का नगर परिषद में कोई रिकॉर्ड नहीं मिल सकता कि उन्होंने एक साल में कितने पशुओं को गोशाला छोड़ा है। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द कोई ठोस नीति बनाकर गाेवंश को सड़कों से हटाया जाए, ताकि ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू हो सके और नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें। संवाद
जीरकपुर शहर में अक्सर वीआईपी आवागमन रहता है। इस दौरान अगर कोई संरक्षित पशु सड़क पर आ जाए तो बहुत परेशानी हो जाती है क्योंकि उनको ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को हटाना पड़ता है। इस संबंध में नगर परिषद को करीब 10 दिन पहले एक पत्र लिखा था लेकिन अभी तक जीरकपुर की मुख्य सड़कों पर पशु घूमते नजर आते हैं। - इंस्पेक्टर मनफूल सिंह, प्रभारी, ट्रैफिक पुलिस जीरकपुर