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Mohali News: प्रॉपर्टी डीलर ने वर्ष 2021 में खरीदे स्टांप 2018 में खरीदे दिखाकर की सौदेबाजी, केस दर्ज

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मोहाली। स्टेट क्राइम पुलिस ने ऐसे गिरोह के एक व्यक्ति (प्रॉपर्टी डीलर) के खिलाफ केस दर्ज किया है जो एक वकील के साथ मिलीभगत से फर्जी एग्रीमेंट तैयार कर प्रॉपर्टी को बेचने के लिए वर्ष 2021 में खरीदे गए स्टांप को वर्ष 2018 में खरीदे दिखाकर लाखों रुपये कमा रहा था। यही नहीं, उसने प्रॉपर्टी की एनओसी हासिल करने के लिए फर्जी ईमेल और मोबाइल फोन पर ओटीपी हासिल किए और नगर निगम से रेगुलर एनओसी हासिल कर ली। इसके खिलाफ रेगुलाइजेशन पॉलिसी के तहत पेश किए गए जाने वाले फर्जी स्टांप बनाने का आरोप है। इसके तहत स्टेट क्राइम थाना मोहाली ने प्रॉपर्टी डीलर पर आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज किया है।
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आरोपी की पहचान बठिंडा के अंतर्गत आते गांव बल्ला राम नगर के रहने वाले सुनील कुमार के रूप में हुई है। यह मामला विजिलेंस ब्यूरो के इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह के बयान पर दर्ज किया गया है। जबकि विजिलेंस की जांच में अभी तक ऐसे 6-7 मामले सामने आ चुके हैं।

विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि कुछ प्रॉपर्टी डीलर फर्जी स्टांप लगाकर प्रॉपर्टी की खरीद-फारोख्त कर लाखों रुपये कमा रहे हैं। जब दस्तावेजों की जांच हुई तो सुनील कुमार नाम का प्रॉपर्टी डीलर एनओसी को अप्लाई करने के लिए फर्जी स्टांप लगा रहा था। उसने वर्ष 2021 में खरीदे गए स्टांप को वर्ष 2018 में दिखाकर एडवोकेट रजिंदर मक्कड़ से नोटरी करवाए और प्रॉपर्टी को आगे बेचकर लाखों रुपये कमा लिए। जबकि दूसरी ओर पंजाब सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर अवैध प्लॉटों को स्टांप के आधार पर रेगुलाइजेशन करने संबंधी पॉलिसी जारी की थी। इस पॉलिसी के अनुसार पेश किए जाने वाला स्टांप या प्लॉट कट ऑफ 19 मार्च 2018 से पहले का होना चाहिए था। जिसके आधार पर नगर निगम की ओर से एनओसी हासिल की जा सकती थी। सुनील ने वर्ष 2021 में खरीदे स्टांप को वर्ष 2018 में दिखाकर धोखाधड़ी से एनओसी हासिल कर ली।
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विजिलेंस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने बनती सरकारी फीस भरकर एनओसी हासिल की थी। सरकारी फीस भरी होने के कारण सरकार का कोई माली नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन रेगुलाइजेशन पॉलिसी के तहत पेश किए गए स्टांप फर्जी पाए गए। आरोपी सुनील ने एनओसी की फाइल अप्लाई करते समय कई फाइलों में अन्य व्यक्तियों का मोबाइल नंबर (ओटीपी हासिल करने के लिए), ई-मेल आईडी और फीस संबंधी कागजात किसी अन्य व्यक्ति से भरवाकर नगर निगम बठिंडा से प्रोविजनल एनओसी हासिल की थी।


यह है नियम
जबकि ऐसे मामलों में नियमों के मुताबिक प्रोविजनल एनओसी पास करने के लिए सेल एग्रीमेंट या पॉवर ऑफ अटॉर्नी की जरूरत होती है। यह एनओसी तीन महीने के लिए जारी की जाती थी। तीन महीनों के अंदर-अंदर प्लॉॅट होल्डर की ओर से रजिस्ट्री करवाकर फाइनल एनओसी ली जाती थी। अगर प्लॉट होल्डर तीन महीने के अंदर प्लॉट होल्डर फाइनल एनओसी अप्लाई नहीं करता तो पॉलिसी के अनुसार उसको जारी की प्रोविजनल एनओसी रद्द हो जाती है। बता दें कि एनओसी पास करने का अधिकार नगर निगम कमिश्नर के पास होता है।
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