लालड़ू। जमीन बेचकर और कर्ज लेकर डंकी रूट से अमेरिका गए प्रदीप को बुधवार को भारत डिपोर्ट कर दिया गया है। सोमवार को मेक्सिको बाॅर्डर से दीवार फांदते ही अमेरिकी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
अमेरिकन सरकार की ओर से अवैध तरीके से देश में प्रवेश करने वाले भारतीयों को वापस भेजने के बाद से प्रदीप के अभिभावक सहमे हुए हैं। उनको अपने बेटे के आने की खुशी तो है, पर चिंता सता रही है कि विदेश भेजने के लिए जो कर्ज लिया था उसको कैसे चुकाएंगे।
अमेरिका में अवैध तरीके से घुसे भारतीयों को वहां की सरकार की ओर से डिपोर्ट किए गए भारतीयों में लालड़ू (मोहाली) के गांव जड़ौत का एक 23 साल का प्रदीप भी शामिल है। उनकी अमृतसर एयरपोर्ट से बुधवार देर रात तक घर पहुंचने की उम्मीद है।
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए प्रदीप की दादी गुरमीत कौर, मां नरिंदर कौर उर्फ रानी, पिता कुलबीर ने बताया कि वे खेतीबाड़ी करते हैं। उनका परिवार पहले से ही लाखों रुपये के कर्जे में डूबा है। किसी ट्रेवल एजेंट ने उनको अपने बेटे को अमेरिका भेजकर खूब पैसे कमाने और कर्ज से छुटकारा पाने के सब्जबाग दिखाया। एजेंट ने विश्वास दिलाया था कि प्रदीप को अमेरिका जरूर भेज देगा कोई दिक्कत नहीं होगी।
माता-पिता के अनुसार एजेंट ने यह भी कहा था कि एक बार अमेरिका चला गया तो उनके वारे न्यारे हो जाएंगे। ऐसे में वह एजेंट की बातों में आ गए और उसके चंगुल में फंस गए। उन्होंने एजेंट की बातों में आकर जमीन का एक किला भी बेचा और कुछ कर्जा भी लिया। इसके लिए कुल 41 लाख रुपये जमा किए थे और इसके बाद 12वीं पास प्रदीप को छह महीने पहले अमरीका भेजा था। एजेंट ने उसको अवैध तरीके से अलग-अलग देशों से ले जाते हुए दो दिन पहले ही अमेरिका की सीमा की दीवार फांद कर अमेरिका में घुसाया था। प्रदीप वहां पर तैनात पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इसके बाद अब अमेरिका पुलिस ने उसे अवैध तरीके से घुसने पर डिपोर्ट कर वापस भारत भेज दिया है।
यहीं कोई काम करवा देते तो कर्जे में न डूबते
परिवार वालों ने एजेंट को कोसते हुए कहा कि एजेंट ने अमेरिका भेजने की और नौकरी लगवाने की पूरी गांरटी ली थी। इसलिए इतनी मोटी रकम बेटे को भेजने के लिए खर्च की थी, लेकिन प्रदीप के वापस लौटने की खबर गांव के ही एक व्यक्ति से जैसे उनको मिली तो उनके होश उड़ गए। उन्हें अब सिर पर चढ़े मोटे कर्जे की चिंता सताने लगी है।
दादी ने रोते हुए बताया कि प्रदीप के दादा की मौत के बाद बेटा कुलबीर भी बीमार रहता है और अब घर में खेती करने वाला कोई नहीं है। घर की हालत बहुत खराब है और अब इस कर्जे से उनकी स्थिति और भी बिगड़ जाएगी। उन्हें आस थी कि पोता अमेरिका में कामकाज करके कर्जा उतारेगा। उनके सारे सपने धरे रह गए। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि वे कर्जा लेकर विदेश भेजने के बजाय यहीं कोई काम करवा देते तो वे कर्जे में तो न डूबते।
अगर यहीं नौकरी मिले तो अमेरिका क्यों जाएं...
उन्होंने सरकारों के प्रति रोष जाहिर करते हुए कहा कि अगर सरकारें युवकों को यहीं नाैकरी दें तो लोगों को कर्जा लेकर विदेशों में जाकर काम करने की क्या जरूरत है। परिवार ने भारत और पंजाब सरकार से पैसा वापस करवाने और रोजगार दिलवाने की मांग की है। पिता कुलबीर के अनुसार उसके एक बेटा व एक बेटी है। बेटी स्टडी वीजा पर आस्ट्रेलिया गई हुई है।