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एरोसिटी ब्लॉक-सी में बिजली गुल: फेल हो चुकी अंडरग्राउंड केबल सिस्टम

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मोहाली। एरोसिटी के ब्लॉक-सी के लोग इन दिनों बिजली की मार झेल रहे हैं। अंडरग्राउंड केबल सिस्टम के बार-बार फेल होने से कई घंटे तक बिजली सप्लाई बंद रहती है। कभी चार तो कभी आठ घंटे तक बिजली गुल रहना आम बात है। इससे न सिर्फ घरों के पंखे, लाइट और इन्वर्टर ठप हो जाते हैं, पानी की सप्लाई भी रुक जाती है, क्योंकि यहां बोरवेल से पानी आता है, जो पंप के बिना नहीं आता। रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। खाली प्लॉट, खेत और झाड़ियों से घिरे सुनसान रास्ते लोगों में डर पैदा करते हैं। बुजुर्गों के लिए यह स्थिति सबसे मुश्किल है। न घर में रोशनी, न बाहर सड़क पर स्ट्रीट लाइट, ऊपर से उमस भरी गर्मी। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की सेहत और महिलाओं की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।
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लोग मजबूरी में खुद लगा रहे तार
मौजूदा अंडरग्राउंड वायरिंग सिस्टम के फेल होने से हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई लोग ट्रांसफार्मर से खुद तार खींचकर घरों तक जोड़ रहे हैं। इसमें अंडरग्राउंड और ओवरहेड दोनों तरह के तार लगाए जा रहे हैं। यह बेहद खतरनाक तरीका है, जो कभी भी बड़ा हादसा कर सकता है। जानकारों का कहना है कि पीएसपीसीएल के पास इस तरह की तकनीकी समस्याओं को ठीक करने के लिए पर्याप्त साधन और कौशल नहीं है, जिसके कारण सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है।


पोल वायरिंग ही आखिरी रास्ता
स्थानीय निवासी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि मौजूदा अंडरग्राउंड सिस्टम को हटाकर पोल वायरिंग लगाई जाए जैसा अन्य इलाकों में है। उनका कहना है कि यह सिस्टम शुरू से ही समस्या दे रहा है। अब यह पूरी तरह असफल हो चुका है। जब तक इस पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक हर बरसात में यह समस्या दोहराई जाएगी और हादसे का खतरा बना रहेगा। मामले में अनीता दत्ता कहती हैं कि इस बार मेरा छह हजार रुपये का बिजली बिल आया है, जबकि बिजली आती ही नहीं। सिस्टम फेल हो चुका है। पीएसपीसीएल को मानना होगा कि यह प्रयोग है। अशोक शर्मा बोले कि सबको पता है कि बिजली के तारों से छेड़छाड़ कितनी खतरनाक है, फिर भी लोग मजबूरी में कर रहे हैं। रमेश अग्रवाल ने कहा कि सात साल हो गए यहां आए हुए, लेकिन हर बारिश में बिजली चली जाती है। कभी केबल में नमी, बिजली कर्मियों की हड़ताल, कभी कट के बहाने दिए जाते हैं। शिकायत करने पर भी कोई असर नहीं होता।
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