मोहाली। नगर निगम की वार्डबंदी और आरक्षण को लेकर शहर में पूरे दिन मोहाली में राजनीतिक हलचल बनी रही। सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि कौन-कौन से वार्ड रिजर्व किए जाएंगे और इसका सीधा असर किन नेताओं पर पड़ेगा। परिसीमन समिति की बैठक खत्म होते ही राजनीतिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। अलग-अलग दलों के नेता अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नई वार्डबंदी के बाद मोहाली के कई फेज और सेक्टर ऐसे हैं, जहां पहले कांग्रेस पार्टी के दो से तीन पार्षद सक्रिय थे। अब सीमाओं में बदलाव और आरक्षण की स्थिति साफ होते ही इन्हीं इलाकों में कांग्रेस नेताओं के बीच आपसी टकराव की स्थिति बन सकती है। माना जा रहा है कि एक ही वार्ड में प्रभाव रखने वाले नेता टिकट के लिए आमने-सामने आ सकते हैं।
कांग्रेस के भीतर संभावित घमासान को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति है। अन्य राजनीतिक दल इस स्थिति को अपने लिए अवसर के तौर पर देख रहे हैं। सत्ताधारी पक्ष की रणनीति पर भी नजरें टिकी हैं कि आरक्षण और वार्ड सीमाओं के जरिए वह किस तरह चुनावी संतुलन साधता है। रिजर्व वार्डों की सूची सार्वजनिक होते ही राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। कई नेता अपने वार्ड को जनरल रखने की मांग कर सकते हैं, जबकि कुछ आरक्षण के जरिए नए चेहरों को मौका मिलने की बात कर रहे हैं।
यह है संभावना
नगर निगम की प्रस्तावित वार्डबंदी और आरक्षण को लेकर नई चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार फेज-1 से फेज-5 तक के इलाकों में दो वार्ड पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए रिजर्व किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसे लेकर संबंधित क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इसके साथ ही छह गांवों को मिलाकर पांच अनुसूचित जाति (एससी) के वार्ड बनाए जाने के भी आसार हैं। इन एससी वार्डों के साथ कुछ शहरी इलाकों को भी जोड़े जाने की संभावना बताई जा रही है, ताकि जनसंख्या और क्षेत्रफल का संतुलन बनाया जा सके। इनमें से कुछ गांव पहले ही नगर निगम सीमा में शामिल हैं, जबकि कुछ को नए सिरे से जोड़े जाने की चर्चा है।