मोहाली। अलग-अलग मामलों में जब्त किए वाहनों की नीलामी न होने से थाने कबाड़खाने में तबदील हो रहे हैं। पुलिस थानों में चारों तरफ टूटी-फूटी कारें, बाइक, ट्रक, ट्रैक्टर, कार, जीप हर थानों में जंग खा रहे हैं। पुलिस चाहकर भी इन्हें हटा नहीं पा रही है, क्योंकि बड़ी तादाद में बरामद वाहनों के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। जिस हिसाब से यह वाहन सड़क पर खड़े किए हैं, इससे इनके चोरी होने का डर बना रहता है। यही हाल बलौंगी थाने का है, यहां पर थाने के सामने खुले मैदान में प्रॉपर्टी केस वाहनों को खुले में रखा हुआ है।
पुलिस स्टेशन फेज-1 में जब्त किए गए वाहनों को थाने के सामने पड़ती नर्सरी में रखा है। सोहाना पुलिस थाने की ओर से भी जब्त और हादसा ग्रस्त वाहनों को गमाडा की खाली पड़ी करोड़ों रुपये की जमीन में रख दिया है। इसकी संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस थाना फेज-8 में सड़क किनारे और सामने खाली जगह पर रखा हुआ है। मटौर पुलिस थाने की बात करें तो कुछ वाहन सामने मार्किंग की पार्किंग में खड़े है या बाहर फुटपाथ पर।
लंबी कानूनी प्रकिया और नीलामी न होने से वाहन हो रहे कंडम
शहर में ज्यादातर थानों की स्थिति देखी जाए तो हर माह यहां जब्त वाहनों की संख्या बढ़ती जाती है। पुलिस चाहकर भी इन्हें हटा नहीं पा रही, क्योंकि बड़ी तादाद में बरामद वाहनों के मुकदमे अदालतों में विचाराधीन हैं। राज्य सरकार थानों को अति आधुनिक बनाने में जुटी है लेकिन थानों के विकास के लिए फंड मिलने के बाद भी सूरत नहीं बदली जा सकी। दूसरी तरफ थानों में सैकड़ों गाड़ियां तो ऐसी हैं, जिनके मालिकों तक का पुलिस को पता नहीं है। कई गाड़ियां तो ऐसी पड़ी हैं जो 10 से 15 साल पहले जब्त की गई थीं। जिले के थानों में 10 हजार ऐसे वाहन पड़े हैं, जिनको सात साल से ज्यादा का वक्त हो गया है।
थाने के बाहर खड़े वाहनों से हादसे का खतरा
थाने के अंदर वाहनों को रखने का जगह नहीं है। थाना सड़क किनारे स्थित है। ऐसे में बड़ी संख्या में जब्त किए गए वाहन थाने के बाहर खड़े किए गए हैं। इसमें बड़े वाहन भी शामिल हैं। ऐसे में जाम की समस्या के साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है।
थानाें में जब्त किए गए वाहनों की नीलामी के लिए कोर्ट से आर्डर लेना पड़ता है। इस संबंध में जिला पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
सिरिवेनेला, एसपी सिटी