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Mohali News: शार्टकट के चक्कर में जान गवां रहे लोग, पैदल पार करते हैं पटरियां

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जीरकपुर। रेल की पटरियों के पास मौत नाचती है, इसके बावजूद ढकोली और काठगढ़ के पुरुष और महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ रोजाना बिना डरे पटरिया पार करते हैं। कई लोग अपने छोटे बच्चों को पटरियों के किनारे खेलने के लिए छोड़ देते हैं, जो कि बेहद चिंताजनक है। यहां से दिनभर में सैकड़ों की संख्या में ट्रेनें गुजरती हैं। इसके बावजूद लोगों में मौत का खौफ नहीं है। रेलवे पुलिस के मुताबिक 2026 के जनवरी माह में रेल हादसों में करीब छह लोग जान चुके हैं। ट्रेन हादसों में मरने वालों की उम्र 10 से 38 साल है।
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गांव काठगढ़ की रहने वाली महिला अनीता से पटरी पार करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि फ्लाईओवर से ढकोली जाने में अधिक समय लगता है। वहीं, ढकोली रेलवे फाटक से जाने में करीब दो किमी चलना पड़ता है। कई बार ट्रेन आने पर फाटक बंद हो जाता है। काठगढ़ से पटरी पार कर ढकोली जाने में दस मिनट लगते हैं। इस पड़ताल के दौरान करीब 30 लोग महज आधा घंटे में गुजरे। उन सभी का उत्तर मिला जुला था। ओवरब्रिज और ढकोली रेलवे फाटक से आने में दो से ढाई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। समय भी अधिक लगता है। यहां से निकलने में समय की बचत होती हो और घर की दूरी भी कम है।

जीआरपीएफ एसएचओ के मुताबिक जनवरी के हुए हादसे
बलटाना रेलवे फाटक के पास पतंग लूटने गए दो बच्चे आरुष (10) व शिवम (12) की तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। जो कि हरमिलाप नगर के रहने वाले थे।
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ढकोली रेलवे फाटक के पास कालका से दिल्ली जा रही शताब्दी की चपेट में आने से 10 जनवरी को करीब 35 साल के नौजवान की मौत हो गई थी। जिसकी पहचान नहीं हो पाई थी। युवक 11 जनवरी को करीब साढ़े सात बजे रेलवे लाइन के पास से पैदल गुजर रहा था।

चंडीमंदिर रेलवे लाइन के पास 12 जनवरी को 38 साल के चंद्रशेखर की ट्रेन हादसे में मौत हो गई, जो कि मनीमजारा का रहने वाला था।

जनवरी महीने में रायपुर खुर्द रेलवे लाइन के पास भी एक अज्ञात व्यक्ति का शव रेलवे पुलिस को बरामद हुआ था। जिसकी पहचान नहीं हो पाई।

7 जनवरी को बलटाना रेलवे फाटक के पास 14 वर्षीय युवती की ट्रेन हादसे में मौत हो गई, जो कि बलटाना की रहने वाली थी।



ट्रेन की पटरियों पर होने वाले हादसों के लिए लोग खुद जिम्मेदार हैं। क्योंकि न तो सरकार के पास इतना पुलिसबल है कि पूरी पटरी पर पुलिस तैनात की जाए और ना ही पटरियों को कवर किया जा सकता है। स्थानीय लोगों को खुद सोचना कि ट्रेन पटरियों से दूरी बना कर रखें। पटरियों के आसपास घुमाने नहीं जाएं। लोगों में अवेयरनेस की कमी के कारण हादसे होते हैं। -उर्मिला, एसएचओ, जीआरपी थाना, चंडीगढ़



क्या कहता है नियम

रेलवे पटरियों पर अनाधिकृत रूप से घूमना या उन्हें पार करना (ट्रेस पासिंग) रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 147 के तहत एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए 6 महीने तक की जेल,1,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) दोषी व्यक्ति को पकड़कर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई कर सकती है। - बलजिंदर सिंह, एडवोकेट, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट।
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