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ऑनलाइन ठगी : खन्ना निवासी को धमकी देकर 3.40 करोड़ रुपये हड़पे

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मोहाली। पंजाब में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। खन्ना निवासी गुरनाम सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है कि अज्ञात लोगों ने उन्हें ऑनलाइन धमकी दी। डर का माहौल बनाकर उनसे 3.40 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करवा ली गई। पंजाब स्टेट साइबर क्राइम थाना फेज-4 मोहाली में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इतनी बड़ी रकम किन खातों में गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। 28 अगस्त को ई-जीरो एफआईआर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से साइबर क्राइम थाने पहुंची थी।
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गुरनाम सिंह ने बताया कि वह ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। शिकायत में आरोप है कि किसी व्यक्ति ने उन्हें ऑनलाइन धमकी दी और नुकसान पहुंचाने का डर दिखाया। उन्हें बार-बार परेशान किया गया और दिन-रात धमकियां मिलीं। इसके बाद उनसे उनकी संपत्ति की जानकारी हासिल की गई। बाद में अलग-अलग समय पर 3.40 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में कथित तौर पर ट्रांसफर करवा लिए गए। पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग पर बीएनएस की धारा 318/4, 319/2, 308 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत केस दर्ज किया है।


जांच का आधार वित्तीय लेनदेन का मार्ग

पुलिस शिकायतकर्ता का बीएनएसएस की धारा 180 के तहत बयान दर्ज करेगी। 3.40 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। पुलिस यह पता लगाएगी कि रकम किस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई। यह भी जांच होगी कि रकम किन-किन खातों में आगे भेजी गई। आखिरकार रकम कहां पहुंची, इसका भी पता लगाया जाएगा।
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डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर जोर

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर जुझार सिंह ने बताया कि पुलिस कथित धमकी और संपर्क के डिजिटल माध्यमों की भी जांच करेगी। आरोपियों ने किस नंबर, सोशल मीडिया मंच, एप या अन्य ऑनलाइन माध्यम से शिकायतकर्ता से संपर्क किया था, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। लेनदेन से जुड़े मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है।



साइबर पुलिस की महत्वपूर्ण सलाह

साइबर पुलिस ने नागरिकों को ओटीपी, पिन, पासवर्ड और बैंक विवरण किसी से साझा न करने की सलाह दी है। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर फोन करने को कहा गया है। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध संलग्नक खोलने से बचें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे न दें और रिमोट एक्सेस एप से सावधान रहें। ठगी के बाद आरोपी का मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, एसएमएस, वेबसाइट लिंक, बैंक लेनदेन की जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
एक्सपर्ट की सलाह
साइबर एक्सपर्ट की सलाह साइबर एक्सपर्ट की सलाह ऑनलाइन ठगी के मामलों की जांच सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में कहीं अधिक जटिल होती है। साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते, फिर वॉलेट, यूपीआई और अन्य खातों में तेजी से ट्रांसफर कर देते हैं। कई मामलों में रकम देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंच जाती है। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसे की पूरी ट्रेल को समय रहते पकड़ना और रकम को फ्रीज कराना होती है। साइबर ठगी में सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी सफलता नहीं है। असली सफलता पूरी मनी ट्रेल पकड़ने, रकम फ्रीज कराने, पीड़ित को पैसा वापस दिलाने और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में है। बड़े साइबर गिरोहों की जांच में अक्सर एक से ज्यादा राज्यों की पुलिस शामिल होती है। इसलिए संयुक्त जांच टीम और राज्यों के बीच तेज समन्वय जरूरी है। आईवाईसी ने साइबर अपराध के हॉटस्पॉट और मल्टी-ज्यूरिडिक्शन मामलों के लिए जॉइंट साइबर को-ऑर्डिनेशन टीमों की व्यवस्था भी की है। -मोहिंदर सिंह, रिटायर्ड साइबर एक्सपर्ट मोहाली
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