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अब मातृ भाषा से प्यार करेंगे नौनिहाल, शिक्षा विभाग देगा मंच और सम्मान

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मोहाली। राज्य के स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अब अपनी मातृ भाषा पंजाबी से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने अनूठी पहल की है। इसके तहत स्कूलों में भाषा मंच गठित करने का फैसला लिया गया है और इनके माध्यम से विद्यार्थियों में पंजाबी भाषा को लेकर प्रेम जगाया जाएगा। इसके अलावा अच्छी रचनाओं को विभाग की मैगजीन में छापकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को मंच और सम्मान दिया जाएगा। इसके साथ ही पूरा पंजाब इनकी प्रतिभाओं को जान पाएगा।
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शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की प्रतिभा तलाशने के लिए कई चीजों पर काम कर रहे हैं। यह विशेषज्ञ भी मानते हैं कि विद्यार्थियों को उनकी मातृ भाषा में कोई चीज सिखाई जाती है, तो वह उसे जिंदगी भर नहीं भूल पाते। लेकिन इसी बीच विभाग के ध्यान में आया है कि अपने ही राज्य में बच्चे मातृ भाषा से दूर हो रहे हैं। कई निजी स्कूलों में मातृ भाषा पंजाबी को लेकर दूरियां बढ़ती जा रही हैं। इसके बाद राज्य सरकार के प्रयास से राज्य भाषा के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने की दिशा में काम शुरू हुआ है। वहीं, विभाग ने यह कार्यक्रम इस प्रकार का बनाया है कि विद्यार्थियों की इसमें दिलचस्पी बढ़े। इसके साथ ही उनकी प्रतिभा को एक अच्छा मुकाम हासिल हो सके। ऐसे में स्कूलों में भाषा विभाग के सहयोग से साहित्य सृजन के राज्य स्तरीय मुकाबले करवाए जाएंगे। इनमें बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की रचनाओं को मैगजीन में छापा जाएगा।
पूरे महीने होगा पंजाबी का गुणगान
शिक्षा विभाग की ओर से एक पूरा महीना नवंबर पंजाबी माह के तौर पर मनाया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में कई तरह के कार्यक्रम होंगे। पंजाबी के माध्यम से पूरी दुनिया में नाम कमाने वाले लोगों को विद्यार्थियों से रूबरू करवाएंगे। इसके अलावा भाषा मंच की ओर से अपनी सुविधा के अनुसार एक या दो दिवसीय सभ्याचारक प्रदर्शनी मेला लगाया जाएगा। विद्यार्थियों को पुस्तक सभ्याचार के साथ जोड़ने के लिए पुस्तके मुफ्त बांटीं जाएंगी।
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पीएसईबी साल में करवाता है चार परीक्षा
पंजाब में पंजाबी राज्य भाषा एक्ट लागू है। इसके मुताबिक राज्य में किसी भी तरह की सरकारी नौकरी करने के लिए 10वीं तक पंजाबी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य की हुई है। जो लोग बाहरी राज्यों से आते हैं या फिर जिन्होंने 10वीं तक पंजाबी भाषा की पढ़ाई नहीं की होती है। उनके लिए बोर्ड की ओर से साल में चार बार अतिरिक्त पंजाबी की परीक्षा आयोजित की जाती है। यह परीक्षा 10वीं कक्षा के स्तर तक होती है। इसके बाद बोर्ड की ओर से इस संबंध में प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।
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