मोहाली। अगर आप भी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हैं, तो अब पहले से कहीं ज्यादा तैयारी की जरूरत है। मोहाली में शुरू हुआ पंजाब का पहला ऑटोमैटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, अब पूरी प्रक्रिया के लिए एक नई पारदर्शिता और सख्ती के साथ तैयार हो गया है। इस तकनीकी बदलाव के साथ अब ड्राइविंग टेस्ट में कोई भी मैनुअल दखल संभव नहीं है। पूरा सिस्टम एआई आधारित सेंसर्स और कैमरों की मदद से चलता है, जो हर मोड़, हर गलती और हर निर्णय को रिकॉर्ड करते हैं।
टेस्ट में अब कोई जुगाड़ नहीं चलेगा
पहले जहां कई लोग प्रॉक्सी (दूसरे व्यक्ति से टेस्ट दिलवाना) के सहारे लाइसेंस ले लेते थे, अब ऐसा मुमकिन नहीं है। हर टेस्ट देने वाले की पहचान वेरिफाई होती है और कैमरे लगातार उस पर नजर रखते हैं।
ये हैं नई तकनीक की खूबियां
* पंजाब का पहला पूरी तरह ऑटोमैटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक
* कोई मैनुअल इंटरवेंशन नहीं, इंस्पेक्टर सिर्फ पर्यवेक्षक
* दो जोन पर एक साथ दो अभ्यर्थी टेस्ट दे सकते हैं
* सफेद पट्टियों पर लगे सेंसर-बेस्ड बोलार्ज, गलती करते ही तुरंत रिकॉर्ड
* हर टेस्ट में अगर बोलार्ज को 2 बार हिट किया, तो अभ्यर्थी सीधे फेल
* पैरेलल पार्किंग का समय 135 सेकंड से घटाकर 105 सेकंड
* रिवर्स पार्किंग में भी 30 सेकंड की कटौती
* रिजल्ट उसी दिन शाम को एसएमएस के जरिए भेजा जाता है
क्या कहती है संख्या?
मोहाली, डेराबस्सी और खरड़ से मिलाकर रोजाना करीब 100 से ज्यादा अभ्यर्थी टेस्ट स्लॉट बुक करते हैं। इनमें से करीब ज्यादातर कार और दो पहिया वाहन टेस्ट लिए जाते हैं। लेकिन अब इस तकनीक से सख्त मानकों के चलते करीब 50% लोग ही टेस्ट पास कर पा रहे हैं।
यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटेड है, जिसमें इंसानी दखल की कोई जरूरत नहीं है। पहले जहां लोगों को लग सकता था कि सिफारिश या प्रॉक्सी से काम हो जाएगा, अब वैसा मुमकिन नहीं है। यहां हर गतिविधि सेंसर और कैमरे की नजर में होती है। हमने पैरामीटर्स को पहले से ज्यादा सख्त बनाया है ताकि केवल वही अभ्यर्थी पास हो, जो सही मायनों में सुरक्षित ड्राइविंग कर सके। -संदीप जिंदल, आईटी हेड
हमने पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब एक साथ दो जोन में टेस्ट लिए जा सकते हैं, समय सीमा कम की गई है और सेंसर बेस्ड बोलार्ज से हर गलती ट्रैक की जाती है। यह सब इसलिए किया गया है ताकि सड़क पर वही ड्राइवर आए जो हर सुरक्षा मानक को समझता हो और निभा भी सके। अब प्रॉक्सी या जुगाड़ की कोई गुंजाइश नहीं बची है। -अर्जुन सिंह, जोनल हेड