मोहाली। वीआईपी जिले के गांवों में जगह-जगह और सार्वजनिक स्थानों पर अब आम, नींबू और जामुन आदि के पौधे नजर आएंगे। यह पूरा प्रयास बागवानी विभाग की तरफ से किया जा रहा है। विभाग की इसके लिए कोशिश रहेगी कि किसानों को फसली विभिन्नता का पाठ पढ़ाया जाए और फल पैदा करने के लिए जमीनों का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया जाए। इसी बहाने लोगों को फल और छायादार पौधे मिलेंगे। निदेशक बागबानी शलिंदर कौर आईएसएफ ने इस संबंधी कहा कि अब फलदार पौधों के लिए जमीन का दायरा बढ़ाया जा रहा है। बीस से पच्चीस जुलाई तक खास मुहिम चलाकर गांव के सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाए जाएंगे। इस मुहिम के तहत अब 2.50 लाख सीड बाल पंचायतों में वितरित किए जाएंगे।
जानकारी के मुुताबिक इस मुहिम की शुरूआत मंगलवार को अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर विकास हिमांशु अग्रवाल की तरफ से की गई। उप निदेशक की तरफ से बताया गया कि जिले में तकरीबन नौ हजार सीड बाल नब्बे ग्राम पंचायतों की देखरेख में लगाए जाएंगे। बागवानी विकास अधिकारी डेराबस्सी जसप्रीत सिंह सिद्धू ने बताया कि इस तकनीक से लगाए गए पौधे बहुत जल्दी तैयार हो जाते हैं। इनके मरने की दर बहुत कम होती है। उन्होंने बताया कि सीड बाल हर गांव के तालाब के आसपास व खेल मैदानों के चारों तरफ लगाए जा सकते हैं। इस तरह से किए गए पौधरोपण से जहां वातावरण शुद्घ होता है। साथ ही लोगों को फल मिलते हैं और लोगों को जहर से मुक्त फल मिलते हैं।
बता दें कि कोरोना से ठीक पहले भी पंजाब सरकार ने तंदुरुस्त पंजाब मुहिम शुरू की थी। इसमें पुराने और फलदार वृक्ष लगाने पर जोर दिया गया था। सीएम कैप्टन अमरिदंर सिंह ने इसमें रुचित दिखाई थी। इतना ही नहीं उस समय किसानों को चंदन के पौधे मुफ्त में वितरित किए गए थे।
यह है सीड बॉल तकनीक
सीड बॉल खेती की एक नई विधि है। इसमें बीजों को जब मिट्टी की परत से 1/2 इंच से लेकर 1 इंच तक की गोलाई से सुरक्षित कर लिया जाता है। इसे सीड बॉल कहते हैं। सीड बाल का उपयोग बिना जुताई, बिना जहरीले रसायनों और बिना गोबर के कुदरती खेती करने और मरुस्थलों को हरियाली में बदलने के लिए उपयोग में लाया जाता है। गमलों आदि में लगाए जाने वाले पौधों में भी यह कामयाब तकनीक है।