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Mohali News: अब एआई बताएगा कितनी असरदार है दादी के नुस्खे

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मोहाली। क्या दादी-नानी के नुस्खे, पारंपरिक दवाइयां, जड़ी-बूटियां और औषधीय ज्ञान आधुनिक बीमारियों का सटीक इलाज कर सकते हैं? इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए सेक्टर-67 स्थित नाइपर में 26 से 28 तक दुनिया भर के वैज्ञानिकों का जमावड़ा लगने वाला है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (एएफईसी-आईसीटीआरई 2026) की सबसे खास बात यह है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक रूप से परखने और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर मंथन होगा।
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इस तीन दिवसीय महाकुंभ में यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया सहित 10 से अधिक देशों के 500 से ज्यादा वैज्ञानिक, डॉक्टर और शोधार्थी हिस्सा लेंगे। आयोजन सचिव प्रोफेसर संजय जाचक के अनुसार इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सदियों पुरानी जड़ी-बूटियों की ताकत को आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ जोड़ना है। इसमें केवल लैब में काम करने वाले वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने वाले पारंपरिक वैद्य भी शामिल होंगे, ताकि उनके अनुभव और विज्ञान का मेल कराया जा सके। हिमालय वैलनेस, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, इमामी और सामी-सबिंसा जैसी दिग्गज कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है।
इसके अलावा, वैश्विक प्रकाशन कंपनी एल्सेवियर भी इस आयोजन का हिस्सा बनेगी। चर्चा के दौरान पेट की सेहत (गट माइक्रोबायोटा), पोषण और नई दवाओं की खोज जैसे गंभीर विषयों पर वैज्ञानिक मंथन होगा। नाइपर मोहाली के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने इस पहल को मील का पत्थर बताकर कहा कि संस्थान हमेशा से नई दवाओं की खोज और रिसर्च में अग्रणी रहा है। भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने भी इस आयोजन को अपना पूरा समर्थन दिया है।
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