एनजीटी की कूड़ा खत्म करने की समय सीमा होने वाली पार, कूड़े का पहाड़ बरकरार
नगर निगम को 31 मार्च, 2023 तक कूड़े का पहाड़ खत्म करने का दिया है समय
निजी कंपनी ने 4.35 करोड़ रुपये में कूड़ा प्रोसेस करने का ले रखा है ठेका
शहर से रोज निकलता है 100 मीट्रिक टन कूड़ा, 40 मीट्रिक टन कूड़े से बनाई जाती है खाद
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। शहर से रोजाना करीब 100 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसमें से 60 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8बी में किया जाता है, जबकि बाकी 40 मीट्रिक टन गीले कूड़े को नगर निगम की 16 साइटों पर प्रोसेस किया जाता है और इससे खाद बनाई जाती है। साथ ही डंपिंग ग्राउंड से रोजाना करीब 600 टन कूड़ा प्रोसेस किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कूड़े का पहाड़ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि एनजीटी की ओर से इसको खत्म करने की 31 मार्च तक दी गई समय सीमा पार होने वाली है।
बता दें कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के 31 मार्च, 2023 तक कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के आदेश के बाद नगर निगम ने 4.35 करोड़ रुपये में निजी कंपनी को ठेका देकर काम शुरू करवा दिया था। निगम को उम्मीद है कि जल्द ही कूड़े का पहाड़ खत्म होगा और लोगों की दिक्कतें दूर हो जाएंगी। वहीं, इस बीच अगर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8बी में काम करती इंडस्ट्रियल एरिया की कंपनियों की बात करें तो उनका कहना है कि डंपिंग ग्राउंड के कारण उन्हें काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, रिहायशी इलाके के लोग भी डंपिंग ग्रांउड से आती बदबू के कारण परेशान हैं।
डंपिंग ग्राउंड के बारे में मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान अनुराग अग्रवाल का कहना है कि यहां पर बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियां हैं। इनसे सरकार को लाखों रुपये का राजस्व जाता है। इसके बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। चंडीगढ़ की तर्ज पर आईटी कंपनी वाले इस इलाके में डंपिंग ग्राउंड नहीं होना चाहिए, क्योंकि इस कारण यहां पर कर्मचारियों को बदबू भरे वातावरण में काम करना पड़ रहा है। कूड़े के पहाड़ को हमने हटाने के लिए अदालत में जनहित याचिका (पीआईएल) लगा रखी है। इसके अलावा समय-समय पर निगम, स्थानीय निकाय विभाग और इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के सामने भी कई बार यह मुद्दा उठा चुके हैं लेकिन कहीं पर सुनवाई नहीं हो रही है।
स्वच्छ रैंकिंग में इस बार भी रैंकिंग गिरने का खतरा
स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में वीआईपी सिटी मोहाली को इस बार झटका लगा। इस साल 32 पायदान नीचे गिरकर जिले को देशभर में 113वीं रैंक मिली। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस बार राज्य में मोहाली को तीसरी रैंक मिली है। वहीं पिछले साल मोहाली की 81वीं रैंक थी। इस बार रैंकिंग गिरने के पीछे सबसे बड़ा कारण मशीनों से सफाई का ठेका छह महीने से न होना है। इस बार निगम कूड़े का पहाड़ कम करने में सफल नहीं रहा तो स्वच्छ रैंकिंग पर असर पड़ना तय है।
लोगों की मांग- शहर के बीच से हटाया जाए डंपिंग ग्राउंड
मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8 में बने हुए डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने लिए इंडस्ट्रियल एरिया और आस-पास के रिहायशी इलाके के लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे। इसे लेकर उन्होंने अदालत में भी केस दायर किया था। लोगों की मांग के बाद मोहाली प्रशासन ने डंपिंग ग्राउंड को यहां से शिफ्ट करके डेराबस्सी के गांव समगौली में शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। लेकिन वहां के लोगों के विरोध के बाद उस जगह भी यह डंपिंग ग्राउंड शिफ्ट नहीं हो पाया था। इस संबंध में वहां के लोगों ने केस कर दिया था।
कूड़े में आग लगने से फैलता है जहरीला धुआं
इलाके के लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं कि डंपिंग ग्राउंड में अक्सर आग लग जाती है। इससे बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। लोगों का कहना था कि जब भी डंपिंग ग्रांउड में आग लगती थी तो आसपास के पूरे इलाके में जहरीला धुआं फैल जाता था। इससे लोगों को कई प्रकार के स्वास्थ्य विकारों का सामना करना पड़ता है।
कोट
एनजीटी ने 31 मार्च, 2023 तक कूड़े का पहाड़ खत्म करने का आदेश दिया है। इसके बाद एक निजी कंपनी को ठेका देकर इसे हटाने का काम चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही कूड़े का पहाड़ खत्म हो जाएगा। इसके अलावा डेराबस्सी के नजदीक गांव समगौली में सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए निजी कंपनियों से बात चल रही है। -नवजोत कौर, निगम कमिश्नर