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बड़ी लापरवाही... चार साल बाद भी तय नहीं कि हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर आरओबी बनेगा या आरयूबी

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जीरकपुर। बलटाना के हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर आरओबी बनेगा या फिर आरयूबी बनाया जाएगा, यह अब तक तय नहीं हो पाया है। क्योंकि 14 अगस्त, 2015 को खुद रेलवे ने चंडीगढ़ प्रशासन को आरयूबी परियोजना बनाने का प्रस्ताव भेजा था। अब 4 साल बाद 17 जून, 2020 को रेलवे खुद चंडीगढ़ प्रशासन को लिख रहा है कि हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर आरओबी की संभावना क्यों नहीं तलाशी गई।
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अब बताइए बलटाना के लोगों के लिए इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। इससे साफ साबित होता है कि यूटी प्रशासन और रेलवे विभाग लोगों की समस्या की ओर कतई ध्यान नहीं देता। लोग चाहे रेलवे फाटकों पर ट्रैफिक जाम में फंसकर अपना समय बर्बाद करते रहें।
जबकि चंडीगढ़ प्रशासन और रेलवे की आपसी सहमति के बाद ही हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर दोनों विभागों ने संयुक्त बैठक करने के बाद यहां सर्वे करवाया था। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने रेलवे को आरयूबी का फाइनल प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था।
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जबकि बलटाना के स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सर्वे हो चुका है कि हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर आरओबी नहीं आरयूबी बनेगा, तो नए सिरे से जांच करने का क्या मतलब है। इसका मतलब है कि लोगों को ऐसे ही सालों साल झांसा देते रहें और इसी तरह साल दर साल का समय गुजरता जाएगा और लोगोें की परेशानी ज्यों की त्यों बनी रहेगी।
जबकि सर्वे के दौरान दोनों विभागों की आपसी सहमति में यह तय हुआ था कि यहां आरयूबी ही बनेगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो अफसर शाही के चलते हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर बनने वाला आरयूबी का मुद्दा दोबारा अर्श से फर्श पर पहुंच गया है। इससे स्थानीय लोग आक्रोश में हैं।
31 जनवरी, 2020 को अप्रूवल के लिए भेजा....
26 जून, 2017 को लोगों ने हरमिलाप नगर रेलवे फाटक पर अंडर पास बनाने की मांग राज्यपाल से की थी। इस प्रोजेक्ट ने दो साल बाद 2019 में रफ्तार पकड़ी, जब लोग सड़कों पर उतरे और कई दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठकर धरना प्रदर्शन करते रहे।
इसके बाद यूटी के प्रशासनिक अधिकारियों ने काम में तेजी की और बलटाना के रेलवे फाटक पर रेलवे अंडर पास बनाने के लिए कवायद शुरू हुई। पहले यहां अंडरपास बनाने को लेकर संभावनाएं तलाशी गईं। इस मौके पर यूटी और रेलवे के इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी पहुंचे और जायजा लेने के बाद जब सब कुछ तय हो गया तो यूटी के अधिकारियों ने रेलवे अंडर पास का नक्शा बनाकर अंबाला डीआरएम ऑफिस के इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों को बजट के अप्रूवल के लिए 31 जनवरी, 2020 को फाइल भेज दी थी।
हल नहीं हुआ फाटक का मसला
रेल मंत्री ने 2018 में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में सभी मानव रहित फाटकों को हटाने के निर्देश दिए थे। इस पर काम भी बड़ी तेजी से हुआ है। लेकिन पंजाब के जीरकपुर क्षेत्र एरिया में ढकोली और हरमिलाप नगर रेलवे फाटक का मसला अब तक हल नहीं हो पाया है, इसके पीछे की वजह रेलवे की सुस्त कार्य प्रणाली है। एक ओर से मंत्रालय की ओर से मानव रहित फाटकों को जल्द से जल्द हटाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं अंबाला के इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को नजरअंदाज कर रहे हैं।
बलटाना की 35 कालोनियों के लोग परेशान
पहले यहां से केवल एक ही रेलवे ट्रैक से ट्रेनेें गुजरती थी। लेकिन अब दो ट्रैक बन जाने से ट्रेनेें भी बढ़ गई हैं। अभी जब ट्रेनों का प्रॉपर तरीके से आवागमन शुरू हो जाएगा, तो हर 15 मिनट बाद यह रेलवे फाटक बंद हो जाता है। जिसके चलते बलटाना के 35 कालोनियों सहित लाखों लोगों को रोजाना सुबह और शाम के समय यहां फाटक पर ट्रैफिक जाम में परेशान होना पड़ता है। एक बार फाटक बंद हो जाने के बाद जब एक ट्रेन गुजरती है तो तभी दूसरी के आने का समय हो जाता है, जिससे लोग वहीं फाटक पर ही खड़े रह जाते हैं। ऐसा दिन में बहुत बार होता है और हर बाद आधे घंटे से ज्यादा का समय लोगों का बर्बाद होना तय है।
क्या कहते हैं लोग
-2017 से बलटाना रेलवे फाटक पर अंडर पास बनवाने के लिए प्रयास कर रहा हूं। आमरण अनशन पर भी बैठा था ताकि लोगों को रोजाना के जाम से मुक्ति मिल जाए। इसके लिए यूटी प्रशासन ने अंडर पास का फाइनल स्केच तैयार करके रेलवे अंबाला मंडल के इंजीनियरिंग विंग को जनवरी में भेजा था। परंतु अब तक कोई सकारात्मक रिस्पांस नहीं मिला है।
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-प्रताप सिंह राणा, प्रधान ज्वाइंट एक्शन कमेटी फॉर वेलफेयर ऑफ बलटाना रेजिडेंट्स।
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