खरड़। विजिलेंस ब्यूरो की ओर से पकड़ा गया लाल चंद बंसल का ब्लैकमेलिंग का धंधा कई सालों से चल रहा था। वैसे तो लाल चंद बंसल की मुंडी खरड़ में ऑटो स्पेयर पार्ट्स की दुकान है लेकिन वह दुकान पर कम ही बैठता है। उसे अधिकतर सरकारी दफ्तरों या तहसील कांप्लेक्स में ही देखा गया है। यह पहला मामला नहीं है। पिछले 10 साल में उसके खिलाफ अनेक मामले खरड़ थाने में दर्ज हैं। 2013 में गुरनाम सिंह ने लाल चंद बंसल के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज करवाया था। उसने पहले से ही बिका हुआ प्लाट गुरनाम सिंह को धोखे से दोबारा बेच दिया था। 2015 में ओमेगा सिटी के मालिक स्वर्गीय अमृतपाल सिंह ने लाल चंद समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी कि यह लोग उसके प्रोजेक्ट की आरटीआई के माध्यम से जानकारी लेकर उसे ब्लैकमेल कर रकम मांग रहे हैं। ओमेगा सिटी के मालिक ने फोन पर इनके द्वारा मिली धमकी के बाद इसकी शिकायत एसएसपी मोहाली को दी थी। इसकी जांच के बाद यह मामला दर्ज हुआ था।
परिषद ने शिकायत पर कार्रवाई न करने का प्रस्ताव किया था पास
लाल चंद बंसल की ओर से लगातार की जा रही शिकायतों से परेशान नगर परिषद खरड़ ने 2016 में एक प्रस्ताव पास किया था कि लाल चंद बंसल कॉलोनाइजरों, ठेकेदारों व सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत कर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है इसलिए उसकी झूठी व बेबुनियाद शिकायतों पर गौर न किया जाए और न ही उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई की जाए। ब्लैकमेलिंग से परेशान एक कॉलोनाइजर ने कुछ साल पहले तहसील कांप्लेक्स में लाल चंद बंसल की पिटाई कर दी थी।