मोहाली। इस बार नगर निगम चुनाव केवल वार्डों की लड़ाई नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों, पुराने प्रभाव और दल बदल की परीक्षा बन गए हैं। बड़ी संख्या में ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं जो पहले किसी न किसी पार्टी से जुड़े थे, लेकिन टिकट न मिलने या राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के बाद अब आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं कई नेता पार्टी बदलकर नए झंडे के साथ चुनावी रण में उतर चुके हैं। इस बार करीब 23 उम्मीदवार ऐसे हैं, जो पिछली बार पार्षद का चुनाव हार गए थे। ये पहले अलग राजनीतिक दलों में सक्रिय रहे। कई पूर्व कांग्रेसी अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कुछ नेता आम आदमी पार्टी से नाराज होकर आजाद उम्मीदवार बने हैं। कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। इस बार करीब 24 पूर्व पार्षद भी चुनावी मैदान में हैं। कुछ वार्डों में पति-पत्नी अलग-अलग वार्ड से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे पारिवारिक राजनीतिक प्रभाव साफ दिख रहा है।
पहले आजाद ग्रुप, अब पार्टी से जुड़े
मोहाली में विधायक का पुराना आजाद ग्रुप इस चुनाव में चर्चा का केंद्र बना है। पिछली नगर निगम चुनाव में उन्होंने आजाद उम्मीदवारों का समूह तैयार किया था। इसमें उनको 11 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी। इसके बाद विधायक वे आप में शामिल हुए और विधायक चुने गए। अब उनके समर्थन वाले कुछ पुराने चेहरे दोबारा मैदान में उतर गए हैं।
अकाली दल में बगावत और टिकट विवाद
शिरोमणि अकाली दल में टिकट वितरण को लेकर असंतोष देखने को मिला। जिन पूर्व पार्षदों को पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दी, उन्होंने बगावती तेवर अपनाकर आजाद चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। कुछ नेता अकाली दल छोड़कर आप से उम्मीदवार बने हैं।