वर्ष 2007 में मेंटीनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजंस एक्ट बनाया गया था। इसके तहत जिले वार कमेटियां बनाई जानी थीं, लेकिन दस साल बीत जाने के बाद भी कमेटियों का गठन नहीं किया गया है।
यह जानकारी फेज-2 निवासी एडवोकेट पवन शर्मा सूचना के अधिकार एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी से हासिल हुई। वहीं, हैरानी की बात यह है कि इस सूचना को मुहैया करवाने के लिए लगभग एक साल का समय लगा दिया। वहीं, पंजाब सूचना अधिकार कमीशन की फटकार के बाद यह सूचना दी गई है।
एडवोकेट पवन शर्मा ने बताया कि उन्होंने 12 जुलाई 2015 को सूचना हासिल करने के लिए आरटीआई के तहत आवेदन किया था। उन्हें समय पर कोई जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई। 24 सितंबर 2015 को उन्होेंने ने खुद संबंधित अथॉरिटी के समक्ष पेश हुए। इस दौरान शाखा से संबंधित कर्मचारी रिकॉर्ड लेकर हाजिर हुए।
उन्होंने बताया कि 2 अगस्त 2015 को आरटीआई शाखा की तरफ से रजिस्ट्री के माध्यम से जानकारी भेजी जा चुकी है। पवन शर्मा ने बताया कि उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस कारण उन्होंने पांच अक्तूबर को सूचना अधिकार कमीशन में अपील दायर की थी। उन्होंने कहा कि 14 मार्च 2016 को सुनवाई हुई। इसमें डिप्टी कमिश्नर के आफिस की तरफ से परमबीर सिंह पेश हुए।
उन्होंने अगली सुनवाई तक सूचना मुहैया करवाने के लिए लिखित रूप में आश्वासन दिया। इस मामले की अगली सुनवाई पांच मई को रख दी गई। पांच मई तक डिप्टी कमिश्नर की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। जब वह तारीख पर पेश नहीं हुए तो कमिश्नर ने हिदायतें जारी की गई अगली सुनवाई 21 जून तक हर हाल में मुहैया करवा दी जाए। इस दौरान 23 मई को दफ्तर की तरफ से पत्र जारी कर दिया गया। जो कि 27 मई को उन्हें मिला।
पत्र में दिया यह जवाब
डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर की तरफ से भेजी गई सूचना में बताया गया कि एक्ट के तहत अभी तक जिले में कोई भी कमेटी गठित नहीं की गई है। इस संबंध में दफ्तरी कार्रवाई जारी है। इस संबंध में उप मंडल मजिस्ट्रेट को कमेटी गठित करने के लिए मेंबरों का विवरण भेजने के लिए लिखा गया है। उन्हें अभी तक इस संबंध में रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।