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लालड़ू आज तक नहीं बन पाया गेटवे ऑफ पंजाब, नेताओं के दावे अधूरे

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लालड़ू। अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित पंजाब का पहला शहर लालड़ू आज भी प्रदेश में राज कर चुकी अलग-अलग सरकारों की बेरुखी के कारण बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है। नेताओं ने हर बार चुनाव में लालड़ू को गेटवे ऑफ पंजाब के तौर पर विकसित करने के सब्जबाग दिखाकर हर बार वोट बटोरने के लिए वायदे किए हैं, लेकिन चुनाव निकल जाने के बाद वह अपने वादे भूल जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद इलाके का विकास गल्लियों-नालियों तक ही सीमित रखा जाता है। लालड़ू को नगर काउंसिल का दर्जा मिलने के बाद भी लोग नर्क का जीवन जीने को मजबूर हैं। यहां न तो बस स्टैंड है, न खेल का मैदान, न ही लड़कियों के लिए सरकारी कॉलेज, न ही सीएचसी (अस्पताल) में 24 घंटों के लिए सेहत सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही कोई पार्क है। यहां सुविधाओं का टोटा होने पर लालड़ू बदहाली के आंसू रो रहा है।
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जानकारी के मुताबिक 2009 में लालड़ू को नगर काउंसिल का दर्जा मिलने के बाद लोगों को आस जगी थी कि उन्हें अब जल्द ही बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी और नर्क भरी जिंदगी से छुटकारा मिलेगा। लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी आज समस्याएं ज्यों कि त्यों हैं। काउंसिल के तहत आते 17 वार्डों में सफाई का बुरा हाल है और जगह-जगह लटक रही बिजली की तार के गुच्छे हादसों को न्योता दे रहे हैं। फौजी मैदान दशकों से गंदे पानी से लबालब भरा है और ऐसी ही अन्य समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं। यहां कोई भी खेल का मैदान न होने से बच्चे गलियों में खेलने को मजबूर हैं और कोई भी सरकार यहां एक भी पार्क नहीं बनवा सकी। दो गोशाला होने के बाद भी लावारिस पशुओं के झुंड सड़कों पर घूम रहे हैं। इनके हमलों से दर्जनों परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं। मोहाली जाने के लिए सीधी बस सेवा न होने से लोग काफी परेशान होते हैं।
बस स्टैंड न होने से दिक्कत
कस्बा लालड़ू दर्जनों गांव का केंद्र है। यहां बस स्टैंड न होने से लोगों को बस पकड़ने के लिए हाईवे पर खड़े होकर ही बस पकड़नी पड़ती है। जबकि यहां पर सड़क पार करते समय हुए कई हादसों में काफी लोगों की जान जा चुकी है और बहुत से जख्मी हो चुके हैं। -सन्नी शर्मा।
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सेहत सुविधाएं नहीं
लालड़ू में करोड़ों रुपये की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की इमारत बनने के बाद भी अस्पताल में 24 घंटे की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। लोगों को दोपहर के बाद डाक्टरों के न मिलने से उपचार के लिए डेराबस्सी, अंबाला, चंडीगढ़ सहित अन्य जगहों के अस्पतालों में जाना पड़ता है। आपातकालीन सेवाओं के समय अस्पताल में उपचार न होने से मरीजों की स्थिति गंभीर बन जाती है। -मनप्रीत भट्टी, एडवोकेट।
सरकारी कॉलेज नहीं
लालड़ू में लड़कियों के लिए सरकारी कॉलेज नहीं है। इलाके की लड़कियों को बारहवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए अंबाला, चंडीगढ़, पटियाला और डेराबस्सी जाना पड़ता है। इस कारण आर्थिक बोझ पड़ने और समय की बर्बादी होने से गरीब घरों की लड़कियाें का उच्च शिक्षा का सपना बीच में ही टूट जाता है। -दलजीत सिंह।
ठप पड़ा है एसटीपी प्लांट
लालड़ू में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया सीवरेज सिस्टम एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) तो है, लेकिन इसको आज तक नहीं चलाया गया। इस कारण गंदे पानी की निकासी का बुरा हाल है। जगह-जगह दूषित पानी जमा है और सफाई का बुरा हाल है। बरसात के दिनों में हालत बहुत ही दयनीय हो जाती है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। -जसबीर सिंह, सरदारपुरा।
रोडवेज की बसें नहीं चलतीं
लालड़ू के आसपास दर्जनों गांव बसे हुए हैं और यह कस्बा इन गांवों का केंद्र है। यहां से जिला मोहाली तक किसी भी काम के लिए जाने के लिए रोडवेज की सीधी बस सेवा नहीं है। मोहाली जाने के लिए कई बसें बदलनी पड़ती हैं। इस कारण पैसे और समय की बर्बादी होती है। सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों, रोजाना दफ्तर जाने वाले नौकरी पेशा लोगों, मरीजों और महिलाओं को होती है। -हरविन्द्र सिंह, झरमड़ी।
न पार्क है और न ही खेल मैदान
लालड़ू को नगर काउंसिल बने हुए करीब एक दशक बीत चुका है। यहां पर न तो कोई पार्क है और न ही खेल का मैदान है। बच्चें गलियाें में खेलने के लिए और लोग सड़कों पर सैर करने के लिए मजबूर हैं। सैर करते समय कई लोग हादसों का शिकार भी हो चुके हैं। - डॉ. श्याम शर्मा।
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