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एयरोसिटी में सेहत सुविधाआें का अभाव

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मोहाली। एक तरफ जहां एयरोसिटी लगभग बस गई है। वहीं, लोगों ने यहां रहना तक शुरू कर दिया है। लेकिन अभी तक भी इलाके में सेहत सुविधाएं भगवान भरोसे हैैं। यहां अस्पताल तो दूर डिस्पेंसरी या सरकारी एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं दवाई से ज्यादा खर्च तो लोगों को अस्पताल तक पहुंचने में उठाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि शहर को ध्यान में रखकर उक्त इलाके में भी एक डिस्पेंसरी व एंबुलेंस की सुविधा दी जानी चाहिए। जानकारी के मुताबिक एयरोसिटी एयरपोर्ट रोड के पास ही बसी हुई है। यहां पर चार हजार से अधिक प्लॉट गमाडा की तरफ से काटे गए हैं। कई नामी गांव भी एयरोसिटी से सटे हुए हैं। लेकिन इलाके में सेहत सुविधाओं का अभाव है। हालांकि गमाडा की तरफ से अस्पताल साइटों की नीलामी आदि की जा रही है। लेकिन इन्हें बनने में लंबा समय लग जाएगा। जबकि लोगों का कहना है कि मोहाली, जीरकपुर या चंडीगढ़ की दूरी काफी है। ऐसे में सेहत विभाग को अस्थायी इंतजाम कर इसे शुरू कर देना चाहिए।
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क्या कहते हैं लोग
एयरोसिटी में अस्पताल की जरूरत
प्रदीप सिंह का कहना है कि एयरपोर्ट रोड अब लोगों मोहाली ही नहीं बल्कि कई राज्यों की लाइफ लाइन बन चुका है। ऐसे में हादसे भी होते हैं जबकि इलाके में कोई अस्पताल नहीं है। मोहाली तक पहुंचने से पहले लोगों की जान तक चली जाती है। ऐसे में सेहत मंत्री से अपील है कि एयरपोर्ट रोड पर एक स्थायी एंबुलेंस तैनात की जाए।
मोहाली, चंडीगढ़ जाना आसान नहीं
तेजवीर सिंह का कहना है कि एयरोसिटी अब पूरी तरह से बस गई है। ऐसे में अब लोगों ने रहना भी शुरू कर दिया है। यहां पर एक सरकारी अस्पताल की बहुत ज्यादा जरूरत है। अस्पताल न होने का खामियाजा यहां रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें इलाज के लिए मोहाली, चंडीगढ़ या खरड़ जाना पड़ता है। जोकि इतना भी आसान नहीं है।
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अस्पताल न होना गंभीर
विकास के मुताबिक लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर एयरोसिटी में घर बनाए हैं। लेकिन अस्पताल न होने की समस्या सबसे गंभीर है। एयरोसिटी मोहाली के एक कोने पर है जबकि आपात समय में एयरोसिटी से फेज-छह या अन्य अस्पताल ले जाना आसान नहीं है। क्योंकि सड़क पर हम समय वाहनों का आवागमन रहता है। इतना ही नहीं कई बार इस चक्कर में जान चली जाती है।
दवाई से ज्यादा अस्पताल पहुंचने का खर्च
साहिलप्रीत सिंह का कहना है एयरोसिटी के साथ ही आईटी सिटी भी है। हर समय वहां निर्माण के काम चलते रहते हैं। लेकिन वहां पर काम करने वाले लोगों को भी उचित सेहत सुविधाएं न मिल पाने से दिक्कत आती है। इतना ही नहीं कई बार तो इलाज के चक्कर में लोगों को पूरा दिन काम से छुट्टी तक लेनी पड़ती है। दूसरा अस्पताल तक पहुंचने में 100 रुपये खर्च आ जाता है। जो कि आम आदमी के लिए आसान नहीं है।
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