मोहाली। फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल के परिसर का एक हिस्सा इन दिनों घोर अव्यवस्था और लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। अस्पताल की मॉर्चरी के ठीक पीछे, खुले आसमान के नीचे, पुराने और खराब हो चुके सामान का एक विशाल ढेर लगा हुआ है। मॉर्चरी जैसे संवेदनशील इलाके के पास इस तरह खुले में कबाड़ पड़े रहना प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। यह न केवल अस्पताल की स्वच्छता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए संक्रमण का खतरा भी बढ़ा रहा है।
कबाड़ के ढेर में तब्दील हुई जगह
कबाड़ के इस ढेर में अस्पताल के आवश्यक उपकरणों का मिश्रण शामिल है जो अब उपयोग योग्य नहीं रहे। इसमें पुराने फर्नीचर जैसे टूटी हुई टेबलें और कुर्सियां, मरीजों के उपकरण जैसे फटे हुए गद्दे, खराब हो चुके स्ट्रेचर और टूटी हुई व्हीलचेयर और पुराने बेड, टूटे हुए डस्टबिन और लोहे व लकड़ी के फट्टे। धूल, बारिश और धूप के संपर्क में आकर यह सामान और भी ज्यादा जर्जर हो रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजन इस बदसूरत दृश्य पर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि मॉर्चरी के पास इस तरह खुले में कबाड़ रखना बेहद आपत्तिजनक है। यह सिर्फ बदसूरत नहीं दिखता, बल्कि यह मच्छरों के पनपने और संक्रमण फैलाने का एक सीधा अड्डा है।
रिपेयर या नीलामी का इंतजार
अस्पताल स्टाफ के अनुसार, यह सामान वेल्डिंग और मरम्मत (रिपेयर) के लिए बाहर निकाला गया है। प्रबंधन का दावा है कि जो सामान ठीक हो सकता है, उसे रिपेयर करवाया जाएगा, और बाकी सामान को कंडेमिनेशन लिस्ट में डालकर कबाड़ के रूप में नीलाम किया जाएगा। एक स्टाफ सदस्य ने बताया कि यह एक सतत प्रक्रिया है कि एक सामान ठीक होकर जाता है, तो दूसरा कोई खराब होता है वो आ जाता है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या सामान को रखने की जगह का अभाव है। स्टाफ ने स्पष्ट किया कि हमें इस सामान को व्यवस्थित रूप से रखने के लिए कोई बंद या शेड वाली जगह भी नहीं दी गई है।
आधिकारिक कोट
यह कोई छोड़ा हुआ कबाड़ नहीं है, बल्कि रिपेयर के लिए निकाला गया सामान है। जो आइटम ठीक हो सकते हैं, उन्हें वेल्डिंग और रिपेयर के बाद दोबारा उपयोग में लाया जाएगा। बाकी सामान को कंडेमिनेशन में डालकर कबाड़ के रूप में नीलाम कर दिया जाएगा। अगले चार से पांच दिनों में इसे पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा। कोशिश है कि भविष्य में ऐसा न दिखाई दे। - डॉ. परमिंदर सिंह, सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ)