ड्रग्स की अवैध बिक्री से जुड़ी कड़ियां खंगालने पहुंची टीम, आठ अधिकारियों ने देर रात तक फार्मेसी और लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को मोहाली में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीआरएमई) के सेक्टर-69 स्थित मुख्यालय पर छापा मारा। यह कार्रवाई सोशल एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच तेज करने के तहत की गई। टीम ने फार्मेसी और लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। दो गाड़ियों में पहुंची आठ अधिकारियों की टीम ने शाम करीब पौने चार बजे जांच शुरू की। यह जांच देर रात तक जारी रही। सीबीआई की यह कार्रवाई झोटा हत्याकांड में कथित अवैध दवा बिक्री और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच का अहम हिस्सा है। जांच टीम ने औषधि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, आवेदन, जरूरी दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड की पड़ताल की। हालांकि, छापे के दौरान मिले दस्तावेज या किसी अनियमितता की पुष्टि संबंधी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। सीबीआई ने इस सप्ताह की शुरुआत में मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। एजेंसी ने नई एफआईआर दर्ज कर परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए हैं। अब एजेंसी हत्याकांड की परिस्थितियों और आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
लाइसेंस प्रक्रिया की पड़ताल
सीबीआई की जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि संबंधित मेडिकल स्टोरों को औषधि बिक्री के लाइसेंस जारी करते समय निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं। इसके लिए फार्मेसी से जुड़े रिकॉर्ड और लाइसेंस संबंधी दस्तावेज की जांच की गई। जांच में फार्मासिस्ट के पेशेवर पंजीकरण और मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस के बीच अंतर को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। एजेंसी की कार्रवाई से इस मामले में दवाओं की कथित अवैध बिक्री से जुड़ी संभावित कड़ियों की पड़ताल का संकेत मिलता है।
झोटा हत्याकांड की पृष्ठभूमि
परविंदर सिंह झोटा नशीली दवाओं के दुरुपयोग और दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाते थे। 13 अक्तूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि दुकान के मालिक अश्विनी कुमार के साथ दवाओं की बिक्री को लेकर उनका विवाद हुआ था। यह विवाद हिंसक हो गया था। इस घटना में झोटा की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पंजाब में नशे और दवाओं की कथित अवैध बिक्री के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। अश्विनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था।
आरोपियों को न्यायिक हिरासत
मामले में पांच दिन का रिमांड खत्म होने पर मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार, विपिन गर्ग और लाडी सिंह को बुधवार को सीबीआई अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे एक दिन पहले आरोपी नीलम रानी को भी चार दिन का रिमांड खत्म होने पर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की सभी कड़ियां और जिम्मेदारियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।