मोहाली। पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया के हस्तक्षेप के बाद मोहाली के साथ पंजाब के दस जिलों में शिकारी कुत्तों (अवैध ग्रेहाउंड डॉग) की रेस को रोक दिया गया है। यह रेस 26 जनवरी को चप्पड़चिड़ी में होनी थी।
पेटा ने सभी जिलों के एसएसपी को यह रेस रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मोहाली में होने वाली शिकारी कुत्तों की रेस को एसएसपी दीपक पारीक के निर्देशों के बाद रोक दिया गया। यह रेस कई स्थानों पर आयोजित की जानी थी। तीन रेसों के लिए कानूनी कार्रवाई चल रही है। 19 से 26 जनवरी तक मोहाली के चप्पड़चिड़ी खुर्द, गांव कैलों , फतेहगढ़ साहिब के गांव हवारा, मलेरकोटला के गांव लसोई, रूपनगर के गांव मोरिंडा, लुधियाना शहर के गांव घलोटी और गांव ककराला कलां व 28 जनवरी को लुधियाना ग्रामीण के जगराओं के गांव कमालपुरा में शिकारी कुत्तों की रेस होनी थी।
इन रेसों का पता चलने पर पेटा इंडिया ने संबंधित जिलों के एसएसपी को इसकी सूचना दी। पुलिस के हस्तक्षेप के कारण यह 10 रेस रद्द की गई हैं। जिससे न जाने कितने शिकारी कुत्ते क्रूरता से बच गए। पेटा इंडिया ने एसएसपी से कार्यक्रम के आयोजकों और प्रतिभागियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया है। ग्रेहाउंड रेसिंग में कुत्तों को इतनी खतरनाक गति से दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है कि इससे उनके शरीर पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है, जिससे अक्सर उन्हें चोट लग जाती है या उनकी मौत हो जाती है।
पेटा का मानना है कि हारने वाले कुत्तों को कठोर व्यवहार का सामना करना पड़ सकता था। पेटा इंडिया क्रूएल्टी रिस्पांस लीगल एडवाइजर और एसोसिएट डायरेक्टर मीत अशर ने कहा कि ग्रेहाउंड को अक्सर चोट या मौत के लिए दौड़ाया जाता है। कुत्तों को दौड़ के लिए मजबूर करना स्वाभाविक रूप से क्रूरता है। ऐसी दौड़ भारतीय न्याय संहिता 2023 और पीसीए अधिनियम 1960 के कई प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं, जो जानवरों को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाते हैं। शिकायत में यह भी बताया गया है कि पीसीए अधिनियम 1960 विशेष रूप से जानवरों को अन्य जानवरों से लडऩे के लिए उकसाने को अपराध मानता है।