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सेहत विभाग की टीम ने निजी अस्पताल में मारा छापा, एसडीएम को कार्रवाई के लिए कहा

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डेराबस्सी। रौणी मोहल्ले में रिहायशी क्षेत्र में खुले निजी अस्पताल में कोरोना मरीज रखने के मामले संबंधी अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने बाद सेहत विभाग हरकत में आ गया। सेहत विभाग की टीम ने अस्पताल में छापा मारकर वहां दाखिल मरीजों की जांच की। वहीं, अस्पताल प्रबंधकों ने गुमराह करते हुए क्लीन चिट हासिल कर ली, लेकिन अस्पताल में दाखिल एक कोरोना मरीज का परिवार सामने आने के बाद अस्पताल की पोल खुल गई। इसके बाद सेहत विभाग ने एसडीएम को अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए पत्र लिखते मामले की जांच शुरू कर दी है।
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उक्त मोहल्ले में चल रहे एक निजी अस्पताल पर स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया था कि वहां कोरोना के मरीज रख कर यहां रह रहे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस खबर के प्रकाशित होने बाद में कोरोना के नोडल अफसर डॉ. प्रीत मोहन के नेतृत्व में सेहत विभाग की टीम ने अस्पताल में छापा मारा। देर शाम तक स्थानीय लोगों की तरफ से एक आदर्श नगर गली नंबर चार निवासी मीडिया आगे पेश किया जिसने कबूला कि उसकी माता जिसकी रिपोर्ट 20 तारीख को सिविल अस्पताल से पॉजिटिव आई थी कि हालत बिगड़ने पर उक्त अस्पताल में दाखिल करवाया गया था और अब तक वह पचास हजार रुपये बिल का भुगतान भी कर चुके हैं। इसके उन्होंने सबूत पेश किए। अस्पताल के मालिक डॉ. विजय कुमार ने दावा किया कि वहां करोना का कोई भी मरीज दाखिल नहीं है। इस संबंधी उनकी तरफ से आज सभी दस्तावेज सेहत विभाग की टीम को दिए गए हैं।
कोट..
अस्पताल की तरफ से वहां दाखिल सभी मरीजों की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट पेश की गई हैं। मरीज के पारिवारिक मेंबर सामने आने बाद में उन्होंने एसडीएम को कार्रवाई करने व अस्पताल प्रबंधकों को सभी दस्तावेज व वहां दाखिल मरीजों की पूरी जानकारी व वहां कार्य करने वाले डाक्टरों का रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा है।
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डॉ. संगीता जैन, एसएमओ, सिविल अस्पताल
कैप्शन -अस्पताल जांच के लिए पहुंची सेहत विभाग की टीम को स्थानीय लोग अपना रोष जाहिर करते हुए।
-अस्पताल के बाहर खड़ी सेहत विभाग की टीम
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