जीरकपुर। नगर परिषद के 31 वार्डों के लिए हुए चुनावों के नतीजे घोषित हो गए हैं। इन चुनावों में महिलाओं ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। कुल 31 वार्डों में से पंद्रह पर महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। आम आदमी पार्टी 16 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।आम आदमी पार्टी ने नगर परिषद में बहुमत हासिल किया है।
पार्टी के सोलह विजेताओं में ग्यारह पुरुष और पांच महिला उम्मीदवार शामिल हैं। शिरोमणि अकाली दल को छह सीटें मिली हैं। इनमें चार महिला और दो पुरुष प्रत्याशी विजयी रहे। कांग्रेस ने चार सीटों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस के विजेताओं में दो महिला और दो पुरुष उम्मीदवार हैं। भारतीय जनता पार्टी को भी चार सीटें मिली हैं। भाजपा के लिए तीन महिला और एक पुरुष प्रत्याशी सफल रहे। इसके अलावा, एक निर्दलीय महिला उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की है। संवाद
महिलाओं की मजबूत भागीदारी
नगर परिषद चुनावों में पुरुषों और महिलाओं के बीच जीत का अंतर बहुत कम रहा। कुल 31 वार्डों में से सोलह वार्डों पर पुरुष उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। पंद्रह वार्डों में महिला प्रत्याशी विजेता बनकर उभरीं। यह परिणाम नगर परिषद में महिलाओं की मजबूत भागीदारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कुछ सामान्य वार्डों में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने का प्रयोग सफल नहीं हो पाया। हालांकि कई स्थानों पर महिला प्रत्याशी जीत हासिल करने में सफल रहीं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
परिवारवाद को मतदाताओं ने नकारा
चुनाव परिणामों ने परिवारवाद के खिलाफ मतदाताओं के रुख को भी उजागर किया है। कई राजनीतिक दलों के लिए एक ही परिवार के दो सदस्यों को टिकट देना नुकसानदायक साबित हुआ। भारतीय जनता पार्टी के जगदेव सिंह और उनकी पुत्रवधू जसप्रीत कौर वार्ड नौ और दस से चुनाव हार गए। हरजीत सिंह मिंटा वार्ड तेरह से हार गए, लेकिन उनकी पत्नी स्वर्ण कौर वार्ड चौदह से जीत गईं। कांग्रेस में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पूर्व पार्षद नवतेज नबी वार्ड सत्ताइस से चुनाव हार गए, जबकि उनकी पत्नी निशा वार्ड तीस से जीत गईं। इन नतीजों ने संकेत दिया कि मतदाताओं ने परिवारवाद से अधिक उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि को प्राथमिकता दी।
महिला प्रतिनिधित्व पर आप का रुख
आम आदमी पार्टी नगर परिषद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ऐसे में अध्यक्ष पद पर उसका दावा लगभग तय माना जा रहा है। इस बार पंद्रह महिला पार्षद चुनकर आई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि क्या पार्टी किसी महिला पार्षद को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर मौका देगी। या फिर दोनों शीर्ष पद पुरुष नेताओं के हिस्से जाएंगे। आने वाले दिनों में पार्टी का यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाएगा। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महिलाओं को कितना और कैसा प्रतिनिधित्व मिलता है।