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250 गज के प्लाॅट पर विवाद: गमाडा और यूटी दावेदार, 3.31 करोड़ रुपये देने वाला अलॉटी परेशान

Thu, 27 Feb 2025 01:57 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली

सार

मोहाली के फेज-9 में 250 वर्ग गज के प्लॉट को ई-आक्शन में अक्षित गुप्ता ने 3.31 करोड़ में खरीदा था। जब वे प्लाॅट पर कब्जा लेने गए तो चंडीगढ़ प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। अब प्लाॅट किसकी हद में है, इस बात का फैसला होगा।
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गमाडा ने इस प्लाॅट का किया ऑक्शन। - फोटो :  संवाद 
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विस्तार
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ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी और चंडीगढ़ प्रशासन प्लॉट नंबर-1131 के मामले में आमने-सामने आ गए हैं। गमाडा ने ई-ऑक्शन कर उक्त प्लॉट 3.31 करोड़ रुपये में बेच दिया है, जबकि चंडीगढ़ प्रशासन ने अपना दावा कर अलाॅटी को कब्जा लेने से रोक दिया है। गमाडा और चंडीगढ़ प्रशासन के बीच ई-नीलामी से प्लॉट खरीदने वाले अक्षित गुप्ता परेशान हैं। अब दोनों पक्ष इस मामले में दोबारा डिमार्केशन कराने की तैयारी कर रहे हैं। 

250 वर्ग गज के प्लॉट के ई-आक्शन का है मामला

अक्षित गुप्ता का कहना है कि पिछले दिनों जब वे प्लॉट पर कब्जा लेने गए तो मौके पर पहुंची टीम ने चंडीगढ़ की दुकानों की साइट बताकर उनको रोक दिया। हालात यह हैं कि वास्तव में जमीन किसकी है, यह स्पष्ट नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन और गमाडा दोनों इस प्लाॅट के दावेदार हैं।

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यह मामला फेज-9 में 250 वर्ग गज के प्लॉट के ई-आक्शन का है। इसका ऑक्शन गमाडा ने वर्ष 2024 में किया था। अलाॅटी परेशान है कि उसका रुपया चला गया है। जमीन भी नहीं मिल सकी है। इस विवाद का खामियाजा अलॉटी को भुगतना पड़ रहा है। 

चंडीगढ़ के अधिकारियों के अनुसार गमाडा ने सीएचबी की जमीन का ऑक्शन किया है। गमाडा के अधिकारियों का कहना है कि डिमार्केशन के बाद ही वास्तुस्थिति स्पष्ट होगी।

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पजेशन से पहले पूरी होगी डिमार्केशन प्रक्रिया

जानकारी के अनुसार अक्षित गुप्ता को बड़ा झटका तब लगा, जब गमाडा के अधिकारियों ने बताया कि इस प्लॉट का पजेशन देने के लिए पहले डिमार्केशन प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि यह जमीन किसके अधिकार क्षेत्र में आती है। गमाडा के अधिकारियों ने यह भी कहा कि अगर यह प्लॉट पंजाब के अधिकार क्षेत्र में पाया जाता है तो अलॉटी को पजेशन दे दिया जाएगा, अगर यह चंडीगढ़ के अधिकार क्षेत्र में पाया जाता है तो इस मामले को अफसरों के साथ मिलकर हल किया जाएगा।

क्या कहते हैं अधिकारी

एक प्लॉट का इश्यू मेरे सामने आया था। मैंने एस्टेट आफिसर को बोला है कि इसकी जांच करें। यदि हमारी परिसीमा में आता है तो प्लाॅट उसको दे दें। यदि हमारी परिसीमा में नहीं आता है तो पहली बात कि यह प्लाट ई ऑक्शन में कैसे लग गया, इसका पता लगाएं। दूसरी बात कि आवंटी को इस प्लाॅट के मानकों के अनुसार ही दूसरी जगह पर प्लाॅट अलाट कर दें। - मोनीश कुमार, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर गमाडा

जमीन के विवाद को लेकर ही एरिया की डिमार्केशन कराने का फैसला हुआ है। इसके लिए काम चल रहा है। डिमार्केशन के बाद ही पता चल पाएगा कि वास्तव में वह जमीन किसकी है। -सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, यूटी प्रशासन
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