पंजाब के पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत।
- फोटो : फाइल
वन विभाग में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पूर्व वन मंत्री साधू सिंह धर्मसोत और उनके दो साथियों चमकौर सिंह व कमलजीत सिंह का तीन दिन का रिमांड खत्म होने पर उन्हें विजिलेंस ने सोमवार को जिला अदालत में पेश किया। विजिलेंस ने अदालत में आरोपियों का दो दिन का और रिमांड मांगा था।
विजिलेंस ने तर्क दिया था कि आरोपी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस मामले में दोनों पक्षों के वकीलों की बहस हुई। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में नाभा जेल भेज दिया। अदालत के बाहर पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत के वकील एचएस धनोआ ने बताया कि अदालत में विजिलेंस ने कहा है कि आरोपी मंत्री जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। हालांकि मंत्री ने कहा कि जो उनसे पूछा गया है उसमें उन्होंने सहयोग किया है।
वकील ने बताया कि आरोपी छह दिन तक रिमांड पर थे लेकिन विजिलेंस उनसे कोई रिकवरी नहीं कर पाई है। ऐसे में रिमांड की जरूरत नहीं है।
बता दें कि कुछ समय पहले विजिलेंस मोहाली के डीएफओ गुरअमनप्रीत सिंह और वन विभाग के एक ठेकेदार हरमिंदर सिंह हम्मी को गिरफ्तार किया था।
गुरअनमप्रीत पर दो लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप था। इसके बाद विजिलेंस से पूछताछ में ठेकेदार हरमिंदर सिंह हमी की एक डायरी विजिलेंस के हाथ में लगी थी। इसमें वन विभाग की भ्रष्टाचार की पूरी कहानी सामने आई थी। इस दौरान सामने आया था कि वन विभाग में पोस्टिंग से लेकर एनओसी, खनन और पेड़ों की कटाई के लिए रिश्वत चलती थी।
यह पूरा पैसा विभिन्न चैनलों से होता हुआ मंत्री तक पहुंचता था। इसके बाद विजिलेंस ने दो पूर्व वन मंत्रियों साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजिया समेत नौ लोगों पर केस दर्ज किया था। इसमें तीन लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि आरोपी मंत्री का कहना था कि विजिलेंस ठेकेदार को बचा रही है। उसको भी केस में नामजद किया जाना चाहिए।