मोहाली। ऐतिहासिक गांव चप्पड़चिड़ी में स्थित फतेह बुर्ज (विजय स्तंभ) का नया टेंडर नहीं होने की वजह से बंद कर दिया गया है। यह विजय स्तंभ महान सिख योद्धा बाबा बंदा सिंह बहादुर की मुगलों पर ऐतिहासिक विजय को समर्पित है। दिवाली से कुछ दिन पहले ही इसको बंद करने की वजह से लोग निराश हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस 100 मीटर (328 फीट) ऊंचे मीनार को देखने के लिए आने वाले पर्यटक भी रोजाना लौट रहे हैं। ऐतिहासिक धरोहर को बंद करने पर नगर निगम के मेयर ने नाराजगी प्रकट की है। मामले में गमाडा के सीए ने फिलहाल अनभिज्ञता जाहिर की है।
जानकारी के अनुसार, फतेह बुर्ज की देखभाल और रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली कंपनी का ठेका समाप्त हो चुका है। कंपनी के कर्मचारियों ने बताया कि सरकार की ओर से नया टेंडर जारी नहीं किया गया, इसलिए उन्होंने अपने उपकरण और सामग्रियां समेट कर काम रोक दिया। शिरोमणि अकाली दल के जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह सोहाना ने कहा कि यह स्मारक सिख इतिहास और वीरता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने मांग की है कि इसका नियमित रखरखाव और संचालन सुनिश्चित किया जाए।
सोहाना ने कहा कि वे इस विषय पर टूरिज्म मंत्री, डिप्टी कमिश्नर मोहाली और मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे ताकि फतेह बुर्ज श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों के लिए खोला जा सके। हर शनिवार को इस स्मारक में सैकड़ों श्रद्धालु आते थे। स्कूल के बच्चे यहां शैक्षणिक यात्राओं पर आते थे और शिक्षक उन्हें बाबा बंदा सिंह बहादुर और उनके पांच जनरलों की वीरता व कुर्बानियों के बारे में बताते थे। अब स्मारक बंद होने से यह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शिक्षा का माध्यम भी बंद हो गया है।
चप्पड़चिड़ी में मिली ‘फतेह’
फतेह बुर्ज का निर्माण 12 मई 1710 को चप्पड़चिड़ी के युद्ध की स्मृति में किया गया था। यह ऐतिहासिक लड़ाई थी जिसमें बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में सिख सेना ने सरहिंद के क्रूर मुगल सूबेदार वजीर खान को पराजित कर फतह हासिल की थी। वजीर खान वही था जिसने गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को दीवार में चिनवाकर शहीद किया था।
- सबसे ऊंचा स्मारक : 100 मीटर (328 फीट), भारत का सबसे ऊंचा विजय स्तंभ।
- तीन मंजिला संरचना : प्रत्येक मंजिल बाबा बंदा सिंह बहादुर की तीन ऐतिहासिक जीत- समाना, सढौरा और सरहिंद को समर्पित।
- कलाकृतियां : परिसर में बाबा बंदा सिंह बहादुर और उनके पांच जनरलों की विशाल कांस्य मूर्तियां स्थापित हैं।
मेरी अभी पोस्टिंग हुई है। आज सरकारी छुट्टी है। सोमवार को अधिकारियों से जानकारी लेकर ही बता पाऊंगी। - साक्षी साहनी,सीए, गमाडा
इससे बुरी बात कुछ हो नहीं सकती, निकम्मी सरकार है। वहां न रास्ता ठीक है, न लाइट है। मैं इसकी निंदा करता हूंं। ये कोई ऐसी वैसी चीज नहीं है, ये एक ऐतिहासिक चीज है। मैं सरकार से मांग करता हूं, कि इसके इतिहास से महत्व को मुख्य रखकर रख रखाव होना चाहिए। - कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोहाली