मोहाली। जिला प्रशासन द्वारा किसानों को पराली को बिना जलाए संभालने के लिए पर्यावरण संरक्षण के दूत के रूप में सम्मानित किया। इन किसानों को यह सम्मान विधायक कुलजीत सिंह रंधावा और डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने दिया।
डेराबस्सी सब डिवीजन की नाहर औद्योगिक इकाई लाहली में जिला प्रशासन की ओर से पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से आयोजित एक कार्यक्रम में डेराबस्सी विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने कहा कि हमें ऐसे रोल मॉडल के साथ अनुभव साझा कर अन्य किसानों को शिक्षित और प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें महंगे उपायों के बजाय सरल कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए, ताकि कर्ज और अन्य दुखों से मुक्त जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार धान की सीधी बिजाई को बढ़ावा देकर गिरते जल स्तर को बचाने के लिए किए सराहनीय प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि हमें फसलों के अवशेष नहीं जलाने चाहिए, जो मिट्टी और हमारी वनस्पतियों और जीवों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि इन दूरदर्शी लोगों (खेतों में आग लगाने से परहेज करने वाले किसान) के प्रयासों को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने नाहर इंडस्ट्रीज प्रबंधन से स्थानीय युवाओं को मिल में रोजगार देकर मदद करने की भी अपील की। विधायक रंधावा के अनुरोध को स्वीकार करते हुए, नाहर समूह के कार्यकारी निदेशक अभिनव ओसवाल ने नेक काम की शुरुआत के रूप में युवा को मिल में शामिल किया।
डीसी आशिका जैन ने सम्मानित होने वाले किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आयोजन का उद्देश्य पराली को जलाए बिना उसे बचाने का ठोस संदेश देना है। पीपीसीबी अधिकारियों और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को धान की पराली जलाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सख्त आदेशों से किसानों को अवगत कराने के लिए भी कहा है।
इस मौके पर हरजीत सिंह, भूपिंदर सिंह बदरपुर, तरजिंदर सिंह सैदपुर और कुलविंदर सिंह सोहाना जैसे किसानों ने पराली को आग न लगाने के अपने अनुभव साझा किए. सम्मानित होने वाले किसानों में हरजीत सिंह धीरेमाजरा, गुरलाला सिंह धर्मगढ़, जय सिंह जंडाली, प्रदीप सिंह, केवल कृष्ण, नवजोत सिंह धीरेमाजरा और कमलप्रीत सिंह शामिल थे।
इस मौके पर मौजूद अधिकारियों में एडीसी (जे) विराज एस तिड़के, एसडीएम डेराबस्सी डॉ. हिमांशु गुप्ता, एएसपी डेराबस्सी जयंत पुरी, पर्यावरण इंजीनियर रणतेज शर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी गुरमेल सिंह और तहसीलदार बीरकरन सिंह मौजूद थे।