मोहाली। एक तरफ गर्मी बढ़ रही है, दूसरी तरफ खरड़ के शहरी इलाकों में बिजली संकट पूरी तरह से गहरा गया है। दो दिनों में फिर से बिजली संकट गहरा गया। मंगलवार रात इलाके के कई हिस्सों में लोगों ने पूरी रात जागकर या गाड़ियों में सो कर गुजारी। सुबह 9 बजे लाइट बहाल हुई तो उसके बाद दोबारा फिर 12 बजे तक कट लग गया। लोग पानी तक के लिए तरस गए। मजबूरी में लोग टैंकर मंगवाकर काम चला रहे हैं। जबकि इस मामले को जिला प्रशासन, नगर काउंसिल व पावरकॉम गंभीरता से नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि पहले बिजली की दिक्कत आने पर नंबर जरूर जारी किए थे, लेकिन वह भी लोगों के साथ धोखा है।
जानकारी के मुुताबिक खरड़ में सर्किल एक और दो दोनों में सोमवार से बिजली संकट बना हुआ है। हालांकि सर्किल दो की हालत सबसे ज्यादा खस्ता है। इसके तहत अनाज मंडी और दर्जनों गांव और रिहायशी सोसायटीज लगती हैं। इलाके में मंगलवार को दिन भर कट लगते रहे। उम्मीद थी कि रात को स्थिति ठीक होगी। लेकिन 10 बजे एक बार फिर लाइट गुल हो गई। इसके बाद पूूरी रात लोग परेशान होते रहे। इस मामले में बडाला रोड स्थित गुलमोहर सिटी निवासी मोहित वर्मा ने बताया कि सोमवार से लाइट की दिक्कत बनी हुई है। लोग मुश्किल में हैं। पूरी रात जागकर काटनी पड़ रही है। जब सुबह लाइट आती है, तब तक पानी की दिक्कत शुरू हो जाती है। इसी तरह अनिता शर्मा बताती हैं कि लाइट न होने की वजह से काफी दिक्कत आ रही है। पूरा दिन लोग अपनी ड्यटी से थके हारे घर आते हैं। जबकि रात को लाइट का ड्रामा शुरू हो जाता है। सोशल मीडिया से लेकर अधिकारियों को फोन भी कर लो। लेकिन लाइट के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पंजाब के लोग बिजली के लिए सबसे ज्यादा पेमेंट करते हैं, इसके बाद यह स्थिति पैदा होती है।
विभाग के एसडीओ स्वर्णदीप सिंह ने कहा कि मौसम बदलने की वजह से दिक्कत आ रही है। ओवरलोडिंग की समस्या भी है। इसके अलावा तकनीकी समस्याएं भी आ रही है। कोशिश की जा रही है कि लोगों को बिना किसी कट के बिजली सप्लाई करवाई जाए।
एप भी एक ड्रामा, अधिकारियों से नहीं सीधा संपर्क
लोगों ने बताया कि पावरकॉम की तरफ से जो लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए एप बनाई है, वह भी एक ड्रामा है। उसमें शिकायत करने के लिए ऑनलाइन आप्शन दिया गया है। लेकिन अपनी शिकायत के संबंध में अधिकारी से संपर्क करने का कोई आप्शन नहीं है। जबकि एप में बिजली चोरी की शिकायतों को सुनने लिए अधिकारियों के व्हाट्सएप नंबर दिए गए हैं। लोगों का कहना है कि यह सीधे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है। बिजली विभाग के प्रबंधन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।