मोहाली। अपनी मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अस्थायी शिक्षक आठवें दिन भी मुख्यालय शिक्षा भवन को घेरकर बैठे हैं। इनके चार साथी पेट्रोल की बोतलें और सल्फास की गोलियां लेकर शिक्षा भवन की छत डटे हुए हैं। वहीं यह प्रदर्शनकारी आज राज्य के अन्य अध्यापक और मुलाजिम संगठनों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में शुक्रवार को शिक्षा मंत्री के साथ होने वाली बैठक विफल होने की सूरत में आंदोलन को तेज करने की रणनीति बनाई जाएगी।
बिना शर्त पक्का (स्थायी) किए जाने और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर राज्य के कच्चे (अस्थायी) अध्यापक पिछले बुधवार से शिक्षा विभाग का घेराव करके बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों के चार साथी पिछले आठ दिनों से शिक्षा विभाग की छत पर चढ़े हुए हैं। ये सभी मांगे पूरी न होने पर जान देने की धमकी के साथ शिक्षा विभाग की छत पर जा चढ़े थे। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में प्रदर्शनकारी अध्यापकों की शिक्षा मंत्री, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, शिक्षा सचिव और सीएम के सियासी सलाहकार कैप्टन संदीप संधू होनी तय हुई है। शिक्षा मंत्री के साथ होने वाली इस बैठक से पहले प्रदर्शनकारी अध्यापक समर्थन जुटाने की मुहिम में लग गए हैं। इसके मद्देनजर बुधवार को डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट ने कच्चे अध्यापकों के आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए बयान जारी किया है।
वहीं, वीरवार को गुरुद्वारा श्री अंब साहिब में दोपहर 2 बजे एक बैठक रखी गई है। जिसमें पंजाब की सभी अध्यापक और मुलाजिम संगठनों को आमंत्रित किया गया है। कच्चे अध्यापकों के संघर्ष के लिए बनी स्टेट कमेटी के कनवीनर दविंदर सिंह संधू, अजमेर सिंह औलख और वीरपाल सदाना ने बताया कि इस बैठक में अन्य संगठनों के सहयोग से आंदोलन को तेज करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इन लोगों का कहना है कि शुक्रवार को शिक्षा मंत्री के साथ होने वाली बैठक के विफल होने की सूरत में आंदोलन तेज किया जाएगा। आंदोलन को बड़ा रूप देने के लिए अन्य संगठनों के सहयोग की जरूरत होगी।
प्रदर्शनकारियों को मिला डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट का साथ
डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट ने कच्चे अध्यापकों के आंदोलन को समर्थन दिया है। फ्रंट के राज्य उप प्रधान गुरमीत सुखपुर ने मोहाली में प्रदर्शन कर रहे कच्चे अध्यापकों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा है कि पिछले 18 साल से नाममात्र वेतन पर राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्रोवाइडर, ईजीएस, एआईई, एसटीआर और आईईवी वालंटियर के तौर पर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावों से पहले इन सभी को पक्का करने का वादा किया था। अब मुख्यमंत्री को बिना शर्त इन्हें पक्का करने का आदेश जारी करना चाहिए। सुखपुर ने कच्चे अध्यापकों की मांगे पूरी न हो जाने तक फ्रंट की ओर से हर तरह के समर्थन का भरोसा दिया है।