मोहाली। साल 2019 के आखिर में एक बार फिर लोगों को सूर्य ग्रहण का सामना करना पड़ेगा। यह ग्रहण 26 दिसंबर को सुबह आठ बजे लगेगा जो दोपहर एक बजकर 36 मिनट तक रहेगा। हालांकि ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले यानी 25 सितंबर शाम आठ बजे से ही लग जाएगा। ऐसे में शाम आठ बजे से मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे जो 26 दिसंबर को शाम चार बजे खुलेंगे। यह जानकारी केंद्रीय मंदिर पुजारी परिषद के प्रधान जगदंबा प्रसाद रतूड़ी एवं महासचिव एनके शास्त्री ने दी। उन्होंने बताया कि ग्रहण का यह संयोग 144 साल बाद बना है जो बहुत महत्वपूर्ण है।
ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व है। खासकर गर्भवती महिलाओं को इसका विशेष फल मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सिलाई, बुनाई, और कटाई से परहेज करना चाहिए। भगवान का ध्यान करने से आने वाली संतान काफी तेजस्वी होगी। पुजारी परिषद ने लोगों से अपील की है कि वह अपने निकटवर्ती मंदिरों में जाकर पुजारियों से कुशा मांगकर घर लाएं। ग्रहण का सूतक लगने से पहले उसे जल व पके हुए खाने में रखें। वहीं, पुजारियों से अपील की गई है कि वह परिषद के फैसले का सम्मान करते हुए मंदिरों के कपाट तय समय पर बंद करें। क्योंकि यह शास्त्रीय मर्यादा है। ग्रहण के समय काल में मूर्ति का दर्शन और स्पर्श करना वर्जित है। ग्रहण के बाद मंदिरों में स्थापित मूर्तियों को पहले स्नान करवाएं व वस्त्र बदलने के बाद पूजा अर्चना की जाए।