मोहाली। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के विरोध में सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के डॉक्टर सोमवार को भी हड़ताल पर रहे। इस दौरान उन्होंने अपना काम पूरी तरह बंद रखा और ओपीडी भी बंद रही। इस दौरान डॉक्टरों ने सिविल सर्जन दफ्तर पर ताला लगाकर प्रदर्शन किया। हड़ताल का नेतृत्व कर रहे सीनियर डॉ. परमिंदर ने बताया कि आंदोलन के दौरान, डॉक्टर सरकारी ओपीडी का बॉयकाट कर पेरलर ओपीडी ही देख रहे थे। डॉक्टरों से मांग पत्र प्राप्त करने के बाद 30 जुलाई तक एनपीए में कटौती वापस लेने की घोषणा की गई थी। लेकिन दस दिन हो जाने के बाद भी, सरकार ने वादे पूरे नहीं किए और डॉक्टर अब अपना संघर्ष तेज करने को मजबूर हैं। ऐसे में ज्वाइंट कमेटी के आह्वान पर पंजाब के सभी सरकारी दफ्तरों में ताला लगाकर रोष प्रदर्शन किए गए।
वहीं, 5 अगस्त को भी डॉक्टरों द्वारा पूरी तरह काम बंद करके हड़ताल पर जाने कॉल दी गई है इस बीच आम जनता को आने वाले असुविधा पर खेद जताते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण की बात है। कोरोना हीरो कहलाए जाने वाले डॉक्टर एनपीए में कटौती और सरकार की निजीकरण नीति के खिलाफ लंबे समय से विरोध कर रहे हैं और सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है। अगर भविष्य में संघर्ष तेज हुआ तो पूरी जिम्मेदारी सरकार पर ही आएगी। हालांकि डॉक्टरों की ओर से इमरजेंसी, कोविड आदि में सेवाएं दी जा रही हैं। जबकि इस दौरान ओपीडी सर्विस, इलेक्टिव सर्जरी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वेबिनार, यूडीआइडी कैंप, सरबत बीमा योजना, वीआईपी डयूटी, आर्म्स लाइसेंस और ड्राइविंग लाइसेंस, डोप टेस्ट की सेवाओं को बिल्कुल बंद रखा गया।