डेराबस्सी। पुलिस नकली व बंद नोटों के जरिये करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क खंगालने में जुट गई है। पुलिस ने 10 करोड़ की नकली करंसी के साथ गिरफ्तार हरियाणा के रहने वाले गुरदीप सिंह और सचिन को शनिवार को डेराबस्सी अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को चार दिन का पुलिस रिमांड मिला है। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि यह सारा खेल ग्रीन और पिंक कोडवर्ड में चलाया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार आरोपी गुरदीप हरियाणा की एक राजनीतिक पार्टी की महिला नेता का सगा भाई है और पार्टी के नाम का हवाला देकर लोगों का भरोसा जीतता था। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह जीरकपुर की माया गार्डन सोसाइटी के एक फ्लैट से ठगी का नेटवर्क चला रहा था। वहीं से कारोबारियों को जाल में फंसाकर मोटी रकम ऐंठी जाती थी। हालांकि, जीरकपुर में कभी भी नोट नहीं छापे गए। यह सारा नेटवर्क हरियाणा से चलाया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार आरोपी इससे पहले चार से पांच बार करोड़ों रुपये इस रास्ते लेकर आ चुके थे।
डीएसपी बिक्रमजीत बराड़ ने बताया कि यह गिरोह नोटबंदी के दौर से ही सक्रिय है। व्यापारियों को काला धन सफेद कराने का झांसा देकर गिरोह ने बंद हो चुके 1000 और 2000 के नोटों में करोड़ों जमा कर लिए थे। गिरोह का सरगना दीपक चौहान (40) है। वहीं, एक अन्य आरोपी गुरिंदर सिंह (45) भी पुलिस की पकड़ से दूर बताया जा रहा है।
ग्रीन का मतलब 500 और पिंक 2000 रुपये का नोट
पुलिस के हाथ लगे चैट व बातचीत के अनुसार गिरोह ने पूरी ठगी को कोडवर्ड में बदला था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने ठगी के लिए खास कोडवर्ड रखा था। ग्रीन का मतलब 500 रुपये का नोट और पिंक का मतलब 2000 रुपये का नोट था। इसी भाषा में डीलिंग होती थी ताकि कोई पकड़ न सके। आरोपी लोगों को बंद हो चुके दो हजार के नोट 500 में बदलने के लिए इसी कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। आरोपियों का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी कहते थे कि उनके आरबीआई में अच्छे संपर्क हैं और वे गुपचुप तरीके से नए नोट छपवा सकते हैं। 25 लाख देकर 50 लाख दिलाने का लालच देते थे। यही नहीं, बैंक में रुपये जमा कराने पर डबल फायदा मिलने की बात कही जाती थी। असल में वे 10 लाख असली नोट की आड़ में 40 लाख नकली नोट लोगों को पकड़ा देते थे।
कई राज्यों में पैर फैला है नेटवर्क
गिरोह में 7-8 सदस्य होने का संदेह है, जिनका संबंध हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र से बताया जा रहा है। पुलिस को शक है कि कई अवैध कारोबार से जुड़े लोग नोट बदलवाने को इनसे संपर्क में आए थे। अब पुलिस उन सभी चेहरों की पहचान में जुट गई है।
पहले भी 7 करोड़ की ठगी का केस
पुलिस की ओर से पकड़े गए दोनों आरोपियों पर मोहाली के फेज-1 थाने में 7 करोड़ की ठगी का मामला पहले से दर्ज है। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान इस जालसाज नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आएंगे।
अब तक की बरामदगी
कुल असली करंसी : ₹11 लाख 5 हजार
₹7.42 लाख पुराने 1000 के नोट
₹3.50 लाख पुराने 2000 के नोट
₹13 हजार नए 500 के नोट
कुल नकली करंसी : ₹9 करोड़ 88 लाख
₹8.78 करोड़ : 2000 के 439 बंडल
₹80 लाख : 1000 के 80 बंडल
₹30 लाख : 500 के 60 बंडल