जीरकपुर। गाजीपुर क्षेत्र में वर्ष 2011-12 में माउंट कैलाश लैंड बेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से 150 फ्लैट की शानदार सोसायटी का निर्माण किया गया था। यह सोसायटी उस समय विवादों में आई जब कुछ बिल्डरों ने राजनीतिक रसूख का फायदा उठाकर यहां बने फ्लैटों को दो-दो बार बेच डाला और कुछ फ्लैटों की फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी अपने नाम करवाकर उनकी आगे रजिस्ट्री करवाकर करोड़ों रुपये हजम कर लिए गए। अब इस मामले में हुए घपलों की परतें एक-एक कर खुलनी शुरू हो गई हैं।
यह आरोप कंपनी के पूर्व डायरेक्टर रह चुके कंवरपाल सिंह ने लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस समय सोसायटी बनी, उस समय कंपनी के डायरेक्टर अमित दुआ और कंवरपाल सिंह के अलावा कुल चार पार्टनर इसमें हिस्सेदार थे। लेकिन फ्लैट बनने के दौरान कंवरपाल सिंह ने डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और वार्ड नंबर-11 की पूर्व पार्षद एकता नागपाल के पति विकास नागपाल ने वर्ष 2015 में गगनदीप रेखी को कंपनी का डायरेक्टर बनाकर फ्लैट बेचने की जिम्मेदारी दे दी। लेकिन कंवरपाल सिंह ने शर्त के मुताबिक गगनदीप रेखी को कंपनी का टेकओवर देने से पहले 60 लाख रुपये व्हाइट मनी देकर सोसायटी में बने पांच फ्लैटों की अलॉटमेंट अपने पिता प्रेम सिंह के नाम पर करवा ली।
वहीं दूसरी ओर जब कंपनी का टेकओवर गगनदीप रेखी और विकास नागपाल के हाथ में आया तो इस सोसायटी में घपलेबाजी शुरू हो गई। उस समय अकाली-भाजपा सरकार का गठजोड़ था और विकास नागपाल की पत्नी एकता नागपाल भाजपा की मौजूदा एमसी थी और एनके शर्मा डेराबस्सी हलके के विधायक थे। इस राजनीतिक रसूख का विकास नागपाल ने खूब फायदा उठाया। गगनदीप रेखी ने डायरेक्टर बनाने के बाद वर्ष 2016 में विकास नागपाल के साथ मिलकर फ्लैट बेचने शुरू कर दिए और राजनीतिक रसूख रखने और एसपी कमेटी में अकाली-भाजपा का राज होने के कारण 150 फ्लैटों में से 30 फ्लैट ऐसे थे, जिन्हें मिलीभगत से दो-दो बार बेच दिया गया और करोड़ों रुपये हजम कर लिए गए।
वहीं विकास नागपाल और गगनदीप रेखी ने कंवरपाल सिंह के पिता के नाम जिन पांच फ्लैटों की अलॉटमेंट की थी उसके भी फर्जी कागजात बनाकर उन्हें भी आगे किसी ओर को बेच दिया गया। जब प्रेम सिंह को इस घपले का पता चला तो वह मानसिक परेशान रहने लगे और मामला जीरकपुर थाने पहुंच गया। थाने में दोनों पक्षों में समझौता हुआ और समझौते के दौरान यह तय हुआ कि विकास नागपाल और गगनदीप रेखी तीन लाख रुपये प्रति माह कंवरपाल सिंह के पिता प्रेम सिंह को देंगे। जिसका बाकायदा तौर पर इकरारनामा तैयार करवाकर उस पर हलफिया बयान दर्ज हुआ। जोकि सबूत के तौर पर आज भी कंवरपाल सिंह के पास है। लेकिन सत्ता में पत्नी के होने के चलते विकास नागपाल अपनी शर्तों से मुकर गया और उसने प्रेम सिंह को तीन लाख रुपये की एक किस्त देकर बाकी पैसे देने से इंकार कर दिया था।
मैंने अपने गांव महमा जिला पटियाला में पड़ी जमीन पर लिमिट बनाकर 60 लाख रुपये विकास नागपाल को देकर फ्लैट लिए थे। लेकिन धोखाधड़ी करके उन्हें बेच दिया गया। मैं आज तक उसका ब्याज भुगत रहा हूं। -प्रेम सिंह, कंवरपाल के पिता
मेरा इस मामले से कोई संबंध नहीं है। मैं तो कुछ समय के लिए ही डायरेक्टर बना था। इसके मामले में आप विकास नागपाल से जो पहले डायरेक्टर थे, उनसे बात कर लो। - गगनदीप रेखी डायरेक्टर माउंट कैलाश सोसायटी
यह लोग जो आरोप लगा रहे हैं वह गलत हैं। मैं जिस समय डायरेक्टर था, उस वक्त कोई फ्लैट नहीं बिका था। हमने जो भी फ्लैट बेचे हैं वह माउंट कैलाश के ग्राहकों को बेचें हैं। मुझे इतना याद भी नहीं कि कौन सी रजिस्ट्री की बात कर रहे हैं। क्योंकि उस समय काफी रजिस्ट्रियां हुई थी। बाकी कोर्ट में केस चल रहा है और कोर्ट का जो भी फैसला होगा, मुझे मंजूर होगा। -विकास नागपाल, पूर्व डायरेक्टर माउंट कैलाश सोसायटी