पंजाब के मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने साल 1993 में हुए एक फर्जी एनकाउंटर मामले में तत्कालीन एसएचओ पट्टी सीता राम को आईपीसी की धारा 302 में उम्रकैद व दो लाख जुर्माना, धारा 201 में पांच साल कैद व 50 हजार जुर्माना, धारा 218 में दो साल कैद व 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।
इसी तरह मामले में सीता राम के सह-आरोपी तत्कालीन पुलिस स्टेशन पट्टी में तैनात कांस्टेबल राजपाल को धारा 201 व 120बी में 5 साल कैद व 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने जुर्माने की डेढ़-डेढ़ लाख राशि मृतक सुखवंत सिंह व गुरदेव सिंह के परिवार को देने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई कोर्ट ने 3 मार्च को दोषियों को दोषी करार दिया था। घटना के 32 साल बाद सीबीआई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है।
11 पुलिस अधिकारियों पर था अपहरण, अवैध कारावास और हत्या का आरोप
साल-1993 में तरनतारन पुलिस ने दो युवकों को फर्जी एनकाउंटर में मारा हुआ दिखाया था। इस मामले में 11 पुलिस अधिकारियों पर अपहरण, अवैध कारावास और हत्या का आरोप लगा था। पीड़ित परिवारों के वकील सरबजीत सिंह वेरका ने कहा कि सीबीआई ने इस मामले में 48 गवाहों का हवाला दिया था, लेकिन मुकदमे के दौरान केवल 22 गवाहों ने गवाही दी क्योंकि 23 गवाहों की देरी से सुनवाई के दौरान मौत हो गई और इस तथ्य के कारण कुछ आरोपी बरी हो गए। इसी तरह आरोपी सरदूल सिंह, अमरजीत सिंह, दीदार सिंह और समीर सिंह की मुकदमे के लंबित रहने दौरान मौत हो गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर शुरू की गई थी जांच
मुकदमा शुरू होने के दो साल के भीतर राकेश कुमार गुप्ता की सीबीआई विशेष अदालत ने फैसला सुनाया और 2 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। सीबीआई ने 1995 में पारित सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के आधार पर जांच की थी। शुरू में सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और 27 नवंबर 1996 को ज्ञान सिंह नाम के एक व्यक्ति का बयान दर्ज किया और बाद में फरवरी 1997 में सीबीआई ने एएसआई नोरंग सिंह पुलिस पोस्ट कैरों और पुलिस स्टेशन पट्टी के अन्य लोगों के खिलाफ नियमित केस दर्ज किया था। यह मामला जिला अदालत में विचाराधीन था।