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माइनिंग माफिया की तरफ से काजवे के बैरीकेड तोड़े जाने का मामला

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काजवे पर भारी वाहनों का गुजरना जारी
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माइनिंग माफिया द्वारा बैरिकेड तोड़े जाने का मामला
भारी वाहनों के गुजरने से काजवे को पहुंच रहा नुकसान
समस्या हल न होने के कारण लोगों में भारी रोष
अमर उजाला ब्यूरो
डेराबस्सी।
मुबारिकपुर घग्गर नदी पर पीडब्ल्यूडी की ओर से बनाए गए काजवे पर से भारी वाहनों का गुजरना जारी है। भारी वाहनों की आवाजाही के लिए काजवे के दोनों ओर लगाए गए बैरिकेड को माइनिंग माफिया द्वारा तोड़ दिया जाता है। इस बारे में स्थानीय लोगों द्वारा बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती है। इस कारण लोगों में भारी रोष है। लोगों ने बताया कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यहां से भारी वाहनों की आवाजाही न रोकी गई तो वह अपने स्तर पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासनिक के अधिकारियों की होगी।
जीरकपुर और डेराबस्सी को आपस में जोड़ने के लिए इलाका निवासियों की लंबी मांग पर बीते साल विधानसभा चुनाव से पहले मुबारिकपुर घग्गर नदी पर काजवे का निर्माण किया गया था। इसके चालू होने से डेराबस्सी और जीरकपुर के बीच की दूरी कई किलोमीटर कम हो गई थी। इससे दर्जनों गांवों के निवासियों को बड़ी राहत मिली। चार करोड़ की लागत से बनाए इस काजवे को छोटे वाहनों के लिए ही डिजाइन किया गया है। भारी वाहनों को रोकने के लिए इसके दोनों तरफ लोहे के बैरिकेड लगाए गए हैं। लेकिन डेराबस्सी के मुबारिकपुर क्षेत्र से गुजरती घग्गर नदी के पड़ते गांव ककराली, दफरपुर, मीरपुर, सुंडरा, पंडवाला आदि नाजायज माइनिंग का गढ़ है। माइनिंग माफिया के रेत-बजरी से भरे वाहनों मुबारिकपुर से होकर गुजरना पड़ता था। रेलवे लाइन पर अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद माइनिंग करने वाले वाहनों को डेराबस्सी से घूम कर जाना पड़ रहा है। इससे नाजायज माइनिंग लोगों के नजर में आ रही है। इससे बचने के लिए माइनिंग माफिया बार बार काजवे के दोनों तरफ लगाए गए बैरिकेड रात में तोड़ दिए जाते हैं। माइनिंग माफिया एक महीने में चार बार बैरिकेड तोड़ चुके हैं।
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पीडब्ल्यूडी के एसडीओ जसविंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि बैरिकेड बनाने के लिए ऑडर दिया गया है। इस हफ्ते में नए बैरिकेड लगा दिए जाएंगे। माइनिंग माफिया द्वारा बार बार बैरिकेड तोड़े जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसका पक्का सबूत नहीं है कि कौन तोड़ रहा है। इसके पक्के हल के लिए यहां कंक्रीट का बैरिकेड बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

कैप्शन -मुबारिकपुर घग्गर नदी पर बनाए काजवे से पाबंदी के बावजूद गुजरता भारी वाहन।
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