जीरकपुर। नगर परिषद ने ढकोली से डंपिंग ग्राउंड बंद तो कर दिया, पर इसके लिए नई जगह ढूंढना मुसीबत बन गया है। सोमवार को दोपहर करीब तीन बजे गाजीपुर क्षेत्र में सुखना चो के किनारे पड़ी पंचायती जमीन की पैमाइश करवाने के लिए नगर परिषद के सेनेटरी विभाग की टीम पहुंची। लेकिन इस जमीन का रिकाॅर्ड सही न होने के कारण जमीन की पैमाइश नहीं की जा सकी और नगर परिषद की सेनेटरी विभाग की टीम को वापस लौटना पड़ा।
वहीं, दूसरी ओर मौके पर पहुंचे गांव निवासी भी जमीन की पैमाइश होते देख भड़क गए। रोष जताते हुए गांव निवासियों में बलजीत सिंह, अवतार सिंह, सिमरनजीत सिंह, गुरविंदर सिंह, लाडी, बब्बू, करन, जसविंदर सिंह व अन्य ने बताया कि सुखना चो के नजदीक उनके गांव की नंबर वाली जमीन है और कुछ जमीन पंचायती है, जिसमें कुछ कास्तकारों ने अदालत में केस भी डाला हुआ है। लोगों ने कहा कि हमने लंबे से इस जगह की पैमाइश करवाने के लिए जोर लगा लिया है। लेकिन हमारी एक नहीं सुनी जा रही है। जब नगर परिषद को जमीन की जरूरत है तो माल विभाग भी साथ के साथ आ धमका। लोगों ने कहा कि अगर यहां डंपिंग ग्राउंड बना तो यहां आसपास बदबू फैल जाएगी और कूड़ा उनके खेतों और सुखना चो में गिराया जाएगा। क्योंकि वह जिस जमीन की बात कर रहे हैं वह बिलकुल सुखना चो के किनारे है, हो सकता है की वह नंबर सुखना चो में ही न हो। क्योंकि हमारी पिछली जमीन ही पूरी नही हो रही है तो नगर परिषद की जमीन कैसे पूरी हो जाएगी।
परिषद हमें जमीन बेचने पर कर रहा मजबूर
रोष जाहिर कर रहे लोगों ने बताया की इससे पहले भी नगर परिषद यहां डंपिंग ग्राउंड बनाने का प्रयास कर चुकी है लेकिन गांव निवासियों के विरोध के चलते आज से करीब 6-7 वर्ष पहले भी डंपिंग ग्राउंड का काम बंद करवा दिया। इसके अलावा सुखना चो पार करके नगर परिषद द्वारा एक डंप बनाया हुआ है। इस कारण आसपास कई एकड़ जमीन बंजर हो चुकी है। लोगों ने परेशान होकर वहां खेती करनी ही बंद कर दी है और कूड़े के कारण बदबू व लावारिस कुत्ते उनको बेहद परेशान करते हैं। जबकि लोगों को नदी से निकलकर खेतों में जाना पड़ता है। इसके अलावा कई ओर परेशानियां कूड़ा डंपिंग के कारण आ रही है। इस कारण उन्होंने खेती करनी ही बंद कर दी है। लोगों ने कहा कि जब भी कोई डंपिंग ग्राउंड की बात होती है तो गाजीपुर एरिया को चुना जाता है और नगर परिषद द्वारा उनको अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। लोगों ने कहा की जब तक हमारी जमीन की पैमाइश करवाकर पूरी नही की जाती तब तक विरोध करते रहेंगे।
कोट्स
सरकारी रिकाॅर्ड जो लट्ठे में है, उसमें पंचायती जमीन का नंबर तो है लेकिन उस जगह में गठठे (लंबाई चौड़ाई) का रिकार्ड दर्ज नहीं है। इसलिए हम आज पैमाइश नहीं कर पाए हैं। हमने नगर परिषद को कहा है कि वह लिखित में डीसी मोहाली और रेवेन्यू विभाग पटियाला से पुराना रिकार्ड मंगवाने के लिए बोला है ताकि लट्ठे में दर्ज रिकार्ड के मुताबिक ही पैमाइश की जाए। क्योंकि वह सरकारी रिकार्ड से बाहर काम नहीं कर सकते हैं। जैसे ही रिकाॅर्ड पूरा मिलता है वह दोबारा पैमाइश करवा देंगे। -संदीप शर्मा, कानूनगो जीरकपुर