जीरकपुर। संयुक्त संघर्ष मोर्चा पंजाब के बैनर तले बिजली विभाग की एक बैठक हुई। इसमें ठेका कर्मचारी यूनियन जीरकपुर के ठेका कर्मचारियों ने 28 सितंबर की रात से कामकाज ठप रखने का निर्णय लिया है। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री का घेराव भी किया जाएगा। अपनी मांगों के लिए ठेका कर्मचारी संघर्ष करेंगे। इसके अलावा पंजाबभर के विभिन्न संस्थानों में कार्यरत ठेका संगठन संगरूर में विरोध प्रदर्शन करेंगे। सर्कल सचिव एकम सिद्धू और डिवीजन अध्यक्ष अमनिंदर सिंह ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि पंजाब सरकार ने भगत सिंह की पगड़ी बांधकर कहा था कि हम भगत सिंह के वारिस हैं।
हम पंजाब के कर्मचारियों को स्थायी करेंगे, लेकिन लगता है कि पंजाब सरकार यह भूल गई है। इस बात की याद दिलाने के लिए और कर्मचारियों को ठेका प्रणाली से मुक्त करने के लिए पूरे पंजाब ने संघर्ष का बिगुल बजा दिया है ताकि आम लोगों को पता चल सके कि पंजाब सरकार ने ठेका कर्मचारियों को स्थायी कर दिया है लेकिन वास्तव में आज भी कर्मचारी कच्चे हैं। ठेकेदारों द्वारा उनका शोषण किया जा रहा है। संगठन के नेताओं ने कहा कि जब तक पंजाब सरकार कच्चे कर्मचारियों को स्थायी नहीं करती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
इस बीच जीरकपुर के साथियों ने बताया कि पूरा जीरकपुर 80 कच्चे कर्मचारियों द्वारा चलाया जा रहा है, जिससे लोगों को निर्बाध आपूर्ति मिलती है, इसलिए यदि 28 सितंबर की रात से कर्मचारी पूरी तरह से काम करना बंद कर देते हैं, तो जीरकपुर के लोगों को बिजली से संबंधित समस्याओं का भी सामना करना पड़ेगा क्योंकि यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस बार 1912, जहां लोगों की शिकायतें जाती हैं, वह भी आज रात से इस संघर्ष का हिस्सा बन जाएगा। जिसका मतलब है कि अब उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान रोहित शर्मा, अवतार सिंह, मनजीत सिंह, राजिंदर प्रधान व अन्य मौजूद थे।