मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले विभिन्न सेक्टरों और औद्योगिक इलाकों के कलेक्टर रेट में वृद्धि की घोषणा की है। ये नई दरें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लागू की गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, कलेक्टर रेट में यह संशोधन लंबे समय से लंबित था। मौजूदा बाजार मूल्य और रियल एस्टेट में तेजी को देखते हुए दरों को वास्तविक बाजार स्थिति के अनुरूप लाया गया है। गमाडा ने बताया कि नई दरें सेक्टरवार तय की गई हैं। एयरोसिटी, आईटी सिटी, इंडस्ट्रियल एरिया और प्रमुख सेक्टरों में 10 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। अधिकारियों का कहना है कि नई दरों से सरकारी राजस्व में इजाफा होगा और संपत्ति के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रॉपर्टी मार्केट पर तात्कालिक असर पड़ सकता है क्योंकि रजिस्ट्री की लागत बढ़ेगी।
गमाडा द्वारा बढ़ाई की दरों के अनुसार सेक्टर 53 से 71 और सेक्टर 62 की दरें बढ़ाकर 71,500 रुपये प्रति वर्ग गज कर दी गई हैं, जबकि सेक्टर 76 से 80 में यह 70,000 रुपये प्रति वर्ग गज तय की गई है। वहीं, एरो सिटी, इको-सिटी, और आईटी सिटी जैसे विकसित इलाकों में दरें 65,000 रुपये से 68,000 रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी वृद्धि की गई है। सेक्टर 57-A और सेक्टर 101 के इंडस्ट्रियल प्लॉट्स की दरें अब 45,000 रुपये प्रति वर्ग गज होंगी, जबकि राजपुरा फोकल पॉइंट में यह 18,500 रुपये रखी गई है। इसके अलावा सेक्टर 90 व 91 लैंड पुलिंग प्लाट, एयरोट्रोपोलिस ए से लेकर जे में 65000, औद्योगिक प्लाॅट सेक्टर 101 की 45000, औद्योगिक सेक्टर 101 के 100 व 200 गज के शोरूम की 225000, इसी सेक्टर के 60 गज के शाप की 150000 प्रति वर्ग गज होगीं।
लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस वृद्धि से घर खरीदना और प्लॉट रजिस्ट्री करवाना और महंगा हो जाएगा। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही मंदी का सामना कर रहे प्रॉपर्टी बाजार पर इसका असर पड़ेगा।
यह कहते हैं कारोबारी
इस संबंध में मोहाली प्रापर्टी कंसलटेंट एसोसिएशन के पूर्व प्रधान शलिंदर आनंद ने कहा कि मौजूदा समय में रियल एस्टेट बाजार पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में दरों में बढ़ोतरी से कारोबार और प्रभावित होगा। शहर के वरिष्ठ प्रापर्टी डीलर सुरिंदर सिंह लक्की गुलाटी ने कहा कि हाल के महीनों में प्रॉपर्टी की बिक्री में गिरावट आई है और खरीदार पहले से ही ऊंची रजिस्ट्री फीस व टैक्स से परेशान हैं। अब कलेक्टर रेट बढ़ने से संपत्तियों की रजिस्ट्री और महंगी हो जाएगी, जिससे आम खरीदार पीछे हट जाएंगे।