जीरकपुर। शहर में जगह-जगह सड़कों किनारे और बाजारों में रेहड़ी-फड़ी वालों की ओर से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए नगर काउंसिल में अभी तक आउटसोर्स कर्मचारियों को नहीं रखा जा सका है। जबकि चंद कर्मचारियों के बलबूते जीरकपुर से अतिक्रमण को हटाने के लिए शहर का सर्वे करवाया जा रहा है। भला जब कर्मचारी ही कम होंगे तो इतने बड़े शहर से अतिक्रमण कैसे हटाया जा सकता है।
जबकि नगर काउंसिल को अतिक्रमण हटाने के लिए नौकरी पर रखने को तीस आउटसोर्स कर्मचारियों को रखने की मंजूरी मिलनी थी। लेकिन अभी तक यह काम नहीं किया जा सका है। यह कर्मचारी जीरकपुर एरिया में होने वाले अतिक्रमण को हटाने और जीरकपुर को एक नया रूप देने के लिए रखे जाने वाले थे। प्रस्ताव यह था कि आउटसोर्स कर्मचारी और नगर काउंसिल की अतिक्रमण विंग के कर्मचारी पुलिस बल को लेकर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
लेकिन आउटसोर्स कर्मचारी नहीं रखे जाने से अतिक्रमण विंग के लिए अब दोगुना काम बढ़ गया है। इसकी वजह है कि अब नगर काउंसिल स्ट्रीट वेंडरों का सर्वे करवा रही है। जिससे उनको जगह दी जा सके। लेकिन चंद कर्मचारी होने के कारण यह काम भी धीरे-धीरे ही चल रहा
है।
बता दें कि नगर काउंसिल को आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए लॉकडाउन से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। लेकिन लॉकडाउन के कारण काम सिरे नहीं चढ़ा। ऐसे में अभी नगर काउंसिल द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए नियुक्त सात सदस्यीय टीम ही अतिक्रमण को हटाती है और सर्वे करती है।
सड़कों पर दुकानदारों ने किया कब्जा
जीरकपुर के फुटपाथ और सड़कों पर दुकानदारों ने कब्जा कर अतिक्रमण किया हुआ है। यह दुकानदार अपनी दुकानों के आगे सड़क पर भी बेचने के लिए सामान सजाते हैं। इतना ही नहीं दुकानदारों और रेहड़ी वालों की ओर से सड़क पर कब्जा करने के कारण जीरकपुर की चौड़ी सड़कें सिंगल लेन में तब्दील हो जाती हैं। यह हाल वीआईपी रोड, पीर मुछल्ला, बलटाना और पभात के बाजार का है।