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Mohali News: लापरवाही का दरिया पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

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लालड़ू। सरकारी एलीमेंटरी स्कूल के बच्चे और स्टॉफ जलभराव की समस्या से परेशान हैं। बच्चे लापरवाही का दरिया पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। 1970 में बने इस स्कूल का ग्राउंड और कमरों का लेवल सड़क के लेवल से नीचे है। इस कारण थोड़ी सी बारिश होते ही स्कूल ग्राउंड में पानी भर जाता है। बरसात के मौसम में यह तालाब का रूप धर लेता है। इस कारण इस ग्राउंड में बच्चों की कोई भी खेल गतिविधि नहीं हो पाती। सभी लोगों को कक्षाओं तक पहुंचने में दिक्कत होती है। ज्यादा बारिश होने पर स्कूल के कमरों में भी पानी घुसने की आंशका बनी रहती है। हफ्तों, महीनों तक ग्राउंड में पानी जमा होने से मक्खी और मच्छरों के पनपने की वजह से संक्रामक बीमारी का खतरा बना रहता है। कई छात्रों का कहना है कि पानी सूखने के बाद फिसलन हो जाती है, जिससे वे कई बार फिसल चुके हैं। 1970 में बने इस स्कूल में 12 कमरे हैं, जिसमें से छह जर्जर हालत हैं। यह स्कूल आसपास के गांवों का केंद्र बिंदु है। यहां ग्रामीणों और अन्य स्कूलों के शिक्षकों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन जर्जर हाल कमरों की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
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375 बच्चे करते हैं शिक्षा ग्रहण
पहली से पांचवीं तक के स्कूल में 375 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। यहां पहली, दूसरी, चौथी और पांचवीं की दो-दो सेक्शन हैं, जबकि तीसरी कक्षा का एक ही सेक्शन है। विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए कुल 9 अध्यापक मौजूद हैं। एक अध्यापिका डेपुटेशन पर गई हैं।

स्कूल ग्राउंड में नहीं भरी मिट्टी
स्कूल के सेंटर हेड मेवा सिंह का कहना है कि स्कूल के मैदान का स्तर सड़क से नीचा है। उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों से कई बार मिट्टी डालने की मांग की है, लेकिन अभी तक मिट्टी नहीं डाली गई है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को भी जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल के दूसरी तरफ गली के स्तर के अनुसार एक पाइप बिछाया गया है ताकि जमीन का पानी ज्यादा न बढ़े और कमरों में न घुसे। उन्होंने बताया कि पहले कमरों में पानी घुस जाता था, लेकिन जिस दिन से पाइप बिछाई गई है, बारिश का पानी कमरों में तो नहीं घुसता, लेकिन ग्राउंड में जरूर जमा रहता है।
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कमरे पुराने हैं और सड़क के लेवल से नीचे हैं। छह नए कमरे बनाने की डिमांड की गई है। जैसे ही नए कमरे बन जाएंगे, पुराने तोड़कर उनका लेवल ऊंचा कर नए कमरे बनाए जाएंगे। अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा। - जसबीर कौर, बीपीईओ, लालड़ू
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