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रिश्वत मामला : पटवारी फरार, कारिंदा गिरफ्तार होने से रुके लोगों के काम

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जीरकपुर। लोहगढ़ स्थित पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा के कार्यालय में कार्यरत निजी कारिंदे को इंतकाल बनाने के लिए 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस ने रविवार को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा भी फरार चल रहा है। अब कार्यालय में न पटवारी है और न उसके काम करने वाला कारिंदा। अब इसका असर सोमवार को देखने को उस समय मिला जब यहां अपने काम करवाने के लिए पहुंचे लोगों का कोई काम नहीं हुआ। वहीं जिन लोगों नें अपने कामों के लिए पहले से आवेदन किया हुआ है उनके काम भी रुक गए हैं।
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वहीं, पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा के फरार होने और कारिंदे के गिरफ्तार होने के बाद सैकड़ों लोगों ने अपनी प्रॉपर्टी के दस्तावेजों को लेकर इंतकाल करवाने के एवज में हजारों की रिश्वत मांगने की शिकायतें दर्ज करवाई हैं।
वहीं, दूसरी ओर, पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों पर राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी एक भी शब्द बोलने को तैयार नहीं है। राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों की मानें तो 600 से अधिक लोगों की ओर से प्रॉपर्टी के इंतकाल के लिए आवेदन किया हुआ है और यह दस्तावेज रिश्वत की आड़ में समय पर न मिलने के कारण लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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दस्तावेजों में पहले जानबूझकर लिख देते थे गलत नाम, फिर ठीक करवाने को मांगते थे रिश्वत
जानकारी के मुताबिक पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा के फरार होने और उसके कारिंदे सोनू के रिश्वत के मामले में गिरफ्तार होने के बाद बहुत से लोगों ने उनके दस्तावेज बनवाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही लोगों ने यह भी शिकायत दी है कि पटवारी और उसका कारिंदा दोनोें लोगों से पैसे लेने के बाद भी दस्तावेजों में जानबूझकर गलत नाम लिख देते थे। इसके बाद जब लोग यह गलती ठीक करवाने के लिए आते थे तो उनसे दोबारा रिश्वत मांगी जाती थी। लोगों को मजबूरी में अपने काम करवाने के लिए दोबारा पैसे देने पड़ते थे। यह शिकायतें लोगों ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिये मुख्यमंत्री को भेजी हैं, ताकि पटवारी रविंदरपाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
समय पर नहीं करते काम, बार-बार कटवाते हैं चक्कर
मुख्यमंत्री को ऑनलाइन पोर्टल पर भेजी गई लोगों की ओर से शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा ने कभी अपनी ड्यूटी को समय पर निभाया, क्योंकि जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद 45 दिनों के अंदर-अंदर इंतकाल दस्तावेज मालिक को देना होता है। लेकिन पटवारी की ओर से जानबूझकर 45 दिन पूरे होने के बाद भी पटवारी कार्यालय के बार-बार चक्कर कटवाए जाते हैं और लोगोें के चक्कर बचाने के बदले में हजारों रुपये की रिश्वत की मांग की जाती है।
यह है मामला
बता दें कि रविवार को पटवारी के निजी कारिंदे के खिलाफ चंडीगढ़ निवासी अमनदीप सिंह की शिकायत पर विजिलेंस टीम ने ट्रेप लगाकर पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा को रंगे हाथ गिरफ्तार करने की योजना बनाई थी। अमनदीप के साथ कारिंदे ने इंतकाल देने के लिए 12 हजार रुपये में सौदा तय किया था और रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद कार्यालय खोलकर रिश्वत देने के लिए बुलाया गया था। लेकिन पुलिस को चकमा देकर पटवारी ने अपने कार्यालय में कार्यरत निजी कारिंदे सोनू को रिश्वत की रकम लेने भेज दिया। जिसको विजिलेंस टीम ने रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया था, और साथ ही पटवारी रविंदपाल छाबड़ा के खिलाफ भी केस दर्ज किया था। पटवारी अभी फरार चल रहा है।
जल्द तैनात होगा नया पटवारी
पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा के प्रकरण को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन सैकड़ों की संख्या में लोगों के प्रॉपर्टी के इंतकाल दस्तावेजों की मांग को देखते हुए विभाग के उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत करवा दिया गया है। वहीं, पटवारी रविंदरपाल छाबड़ा की जगह अन्य पटवारी की जल्द ही तैनाती कर दी जाएगी, ताकि लोगों को परेशानियां न हों।
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-पुनीत बांसल, नायब तहसीलदार, सब-तहसील जीरकपुर।
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