मोहाली। पंजाब में बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर संशय बरकरार है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड जहां ऑफलाइन परीक्षाएं करवाना चाहता है, वहीं राज्य सरकार कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इस पर कोई फैसला नहीं ले पा रही है। जबकि बोर्ड ने परीक्षाओं के आयोजन के लिए प्रपोजल सरकार को भेज दिया है। उधर, हाईकोर्ट में पंजाब सरकार की ओर से दिए गए जवाब में परीक्षाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
पंजाब के करीब 13 लाख विद्यार्थियों की परीक्षाओं पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए 30 अप्रैल तक के लिए स्कूल बंद कर दिए गए हैं। यह पहले 10 अप्रैल तक बंद किए गए थे। इस कारण पांचवीं की बोर्ड परीक्षाएं बीच में ही रूक गई और दो पेपर नहीं हो सके। हालांकि बोर्ड पांचवीं के विद्यार्थियों की चार परीक्षाएं ले चुका है।
उधर, आठवीं, दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं पर असमंजस बना हुआ है। पिछले साल कोरोना के कारण स्कूल बंद रहे। सरकार ने नवंबर में स्कूलों को सशर्त खोला था। इसके बाद मार्च में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी की गई थी। मार्च आते-आते राज्य में कोरोना संक्रमण फिर से बेकाबू होने के कारण स्कूलों को बंद करने के साथ ही परीक्षाओं पर भी संकट के बादल छा गए। हालांकि राज्य में बोर्ड की प्रेक्टिकल परीक्षाएं चल रही हैं। वहीं, मार्च में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर कोरोना के हालातों के मद्देनजर स्कूलों में परीक्षाएं करवाने के बजाय ऑनलाइन परीक्षाएं करवाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट मेें पंजाब सरकार ने ऑनलाइन कक्षाएं लिए जाने की बात तो कही, लेकिन परीक्षाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
उधर, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने आठवीं, दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं के लिए प्रपोजल तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। हालांकि बोर्ड के अधिकारी सरकार को भेजे गए प्रपोजल की जानकारी देने से कतरा रहे हैं। फिर भी इतना स्पष्ट है कि बोर्ड ऑनलाइन परीक्षाएं लेने के पक्ष में नहीं है। बोर्ड चाहता है कि दसवीं-बारहवीं की परीक्षाओं का महत्व देखते हुए इनको ऑफलाइन ही स्कूलों में करवाया जाए।
परीक्षाओं के दौरान यह नियम जरूरी
मोहाली के डीसी गिरीश दियालन ने स्कूल-कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि 12 से 30 अप्रैल के बीच जरूरी होने पर अगर कोई शिक्षण संस्थान परीक्षाएं आयोजित करता है तो इस दौरान एक क्लासरूम में 15 से ज्यादा विद्यार्थी नहीं बैठेंगे। विद्यार्थियों और स्टाफ को मास्क पहना और शरीरिक दूरी के नियमों का पालन करना अत्यंत जरूरी होगा। साथ ही परिसर को सैनिटाइज करने का इंतजाम भी करना होगा।
पांचवीं की परीक्षाएं बीच में रोकी
कोरोना काल के दौरान चल रहीं पांचवीं की परीक्षाएं भी बीच में ही रुक गई हैं। चार पेपर के बाद स्कूल बंद कर दिए गए थे और बाकी पेपर अभी होने हैं। वहीं आठवीं की परीक्षाएं शुरू ही नहीं हो सकी थीं। कोरोना काल के दौरान राज्य के 18 हजार 80 परीक्षा केंद्रों पर 3 लाख 20 हजार विद्यार्थियों ने पांचवीं की चार परीक्षाएं दीं। इस दौरान राज्य के 19 विद्यार्थी कोरोना संक्रमित होने के कारण परीक्षा नहीं दे सके।
हमारा काम सरकार के आदेशों का अनुपालन करना है। हम परीक्षाएं करवाने के लिए तैयार हैं। सरकार के आदेश पर एक सप्ताह में सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। कक्षा में 6 फीट की दूरी पर परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था पहले की जा चुकी है। नियम के तहत एक कमरे में 10 से ज्यादा परीक्षार्थी नहीं होंगे। हर विद्यार्थी सभी परीक्षाएं एक निर्धारित सीट पर ही देगा। पांचवीं की परीक्षा के दौरान बरती गई सावधानियां आगामी परीक्षाओं में भी अपनाई जाएंगी। बोर्ड की परीक्षाओं पर अंतिम फैसला सरकार कोरोना के हालात को देखते हुए लेगी। - जनक राज महरोक, परीक्षा नियंत्रक पीएसईबी