बलटाना लाइट प्वाइंट पर सीवरेज लाइन बनने से पहले ही हुई ब्लॉक
खुली पड़ी सीवरेज लाइन में भरा पानी दे रहा हादसों को न्योता
संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। बलटाना लाइट प्वाइंट पर बनाए जा रहे अंडरपास का काम पिछले दो महीने से रुका पड़ा है। अभी तक कई एनओसी अलग-अलग विभागों से लेनी बाकी है। हालांकि जीरकपुर से पंचकूला जाने वाली साइड कलगीधर एनक्लेव मार्केट के सामने की साइड सड़क चौड़ी कर ड्रेन डाल दी गई है, लेकिन बरसात ने उस पर भी पानी फेर दिया है। पिछले दिनों हुई बरसात के कारण ड्रेन में पानी भर गया है और डाली जा रही सीवरेज लाइन पूरी तरफ ब्लॉक हो चुकी है।
सीवरेज लाइन में आसपास पड़ी मिट्टी लाइन में गिर गई है जिस कारण पानी निकालने में समस्या हो रही है। हालांकि बरसात हुई करीब तीन से चार दिन बीत जाने के बाद भी ड्रेन पानी से भरी हुई है। इसका बहाना लेकर काम में और देरी की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ पंचकूला से जीरकपुर जाते जो ड्रेन लाइन बनाई जा रही थी, वह एनओसी की समस्या के चलते बंद कर दी गई है। अब समस्या है कि दो हिस्सों में बंटी यह ड्रेन एक तो खुली पड़ी है और दूसरा उसमें पानी भरा हुआ है जो हादसों का कारण बन सकता है जबकि एनएचएआई की जिम्मेदारी बनती है कि ड्रेन को दो साइड से कवर किया जाए ताकि कोई हादसा न हो। बलटाना लाइट प्वाइंट से 100 मीटर पीछे और 100 मीटर आगे नई डाली जा रही सीवरेज लाइन खुली पड़ी है।
बॉक्स
काम के लिए तोड़ी स्लिप रोड के कारण लग रहा जाम
पंचकूला से जीरकपुर जाते समय बलटाना लाइट प्वाइंट से पहले करीब 200 मीटर स्लिप रोड बनी हुई थी। वह अंडरपास बनाने के लिए तोड़कर सीवरेज लाइन बना दी गई और बाकी जो रास्ता 10-12 फुट बचा हुआ, उस पर मिट्टी व पत्थर गिरा दिए गए हैं। ऐसे गड्ढे सड़क में बन गए हैं कि लोगों को सांप-सीढ़ी गेम की तरह जिग-जैग चलना पड़ता। ढकोली जाने वाले लोग ज्यादातर स्लिप रोड से निकल जाते थे लेकिन अब उन्हें भी जाम से होकर गुजरना पड़ता है। पहले यह स्लिप रोड काफी फायदेमंद साबित होती थी लेकिन अब लोगों के लिए समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अंडरपास का काम दोबारा शुरू नहीं होता, तब तक कम से कम स्लिप रोड तो ठीक कर दी जाए ताकि लोगों को आने-जाने में आसानी हो।
कोट्स
बरसात के कारण पानी भरने से काम रुका हुआ है। जैसे ही पानी सूख जाएगा तो काम दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। स्लिप रोड के बारे में आला अधिकारियों से बात कर कोई हल निकाला जाएगा। -गुरजीत सिंह, साइट इंजीनियर