मोहाली। राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और उनके छोटे भाई एवं नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के भाजपा ज्वाइन करते ही इलाके की राजनीति गरमा गई है। साथ ही भाजपा का नगर निगम पर कब्जा हो गया है।
मोहाली पंजाब की पहली नगर निगम है, जिसका मेयर अब भाजपा का है। दूसरी तरफ विरोधी दलों के नेता उन पर जुबानी हमला बोल रहे हैं। जानकारों की माने तो मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की राह आसान नहीं है क्योंकि काफी संख्या में पार्षद उनके साथ जुड़े हुए हैं। वही भाजपा के जिला उपप्रधान अरुण शर्मा ने कहा कि यह काफी खुशी का दिन है। दोनों नेताओं के ज्वाइन करने से पार्टी को मजबूती मिली है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू व उनके छोटे भाई मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के भाजपा में शामिल होने संबंधी किसी को भी शनिवार दोपहर तक भनक नहीं थी। सूत्रों की माने तो इस संबंधी उन्होंने अपने पार्षदों को भरोसे में नहीं लिया था। जब दोनों के भाजपा में शामिल होने की खबरें आईं तो सभी हैरानी में आ गए। हालांकि अधिकतर कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि उनसे इस बारे में कोई बातचीत नहीं की गई। वहीं 30 साल से मोहाली की राजनीति को देेख रहे फेज-सात निवासी जगदीप सिंह बताते हैं कि मोहाली हलके में कांग्रेस पार्टी से ज्यादा बलबीर सिंह सिद्धू का रसूख है। वह लोगों से सीधे जुड़े हैं। वहीं, अधिकतर पार्षद भी उनके फैसले को ही मानेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव को कर जाएंगे पार
नगर निगम की पचास सीटें हैं। यदि मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो विरोधी पार्षदों को दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी। सूत्रों की माने तो कांग्रेस के 37 पार्षदों से 17 तो सीधे अमरजीत सिंह सिद्धू के करीबी हैं। इसके अलावा दस के करीब पार्षद उन्हें समर्थन भी दे देंगे। ऐसे में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की राह मुश्किल होगी। जबकि विरोधी दल को 34 पार्षद जुटाने होंगे। गत वर्ष निगम चुनाव में पचास सीटों में से कांग्रेस ने 37 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में अकाली दल और भाजपा ने अलग होकर चुनाव लड़ा था। दोनों पार्टियां खाता तक नहीं खोल पाई थी जबकि आजाद ग्रुप व आम आदर्मी पार्टी ने मिलकर 12 सीटों पर कब्जा किया था।एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। इससे पहले 2015 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा ने छह सीटें जीती थीं। अकाली दल और भाजपा का निगम पर कब्जा रहा था। हालांकि भाजपा पूरे पांच साल सीनियर डिप्टी मेयर के लिए जंग लड़ती रह गई थी।
क्या कहते हैं नेता
मेयर अपने पद से इस्तीफा दें
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और मोहाली के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर आप नेता एवं विधायक कुलवंत सिंह ने भी चुटकी ली। इस फैसले से बलबीर सिंह सिद्धू का दोगला चेहरा सामने आया है। वह कांग्रेस पार्टी को अपनी मां कहते थे, साथ ही सारी उम्र उसी में रहने की बातें करते थे। कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीतकर मेयर बनने वाले अमरजीत सिंह जीती सिद्धू को इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही नए सिरे से पार्षदों का विश्वास जीतना चाहिए।
हमेशा कांग्रेस के साथ खड़ा हूं
मैं कांग्रेस के साथ खड़ा हूं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह का भाजपा में शामिल होना उनका निजी फैसला है। मेरे उनसे निजी संबंध हैं। वह कांग्रेस छोड़कर नहीं जा रहे हैं। वह कांग्रेस के साथ ही रहेंगे। 40 साल से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। मैंने यूथ कांग्रेस से अपना राजनीतिक कॅरिअर शुरू किया था। -कुलजीत सिंह बेदी, सीनियर कांग्रेसी नेता एवं डिप्टी मेयर
टीवी से भाजपा में शामिल होने का पता लगा
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू व मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू ने पार्टी छोड़ने के बारे में किसी को भी भरोसे में नहीं लिया। मुझे इसकी जानकारी टीवी से मिली। वह कांग्रेस पार्टी में है। जल्दी ही बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। -रिश्व जैन, जिला प्रधान कांग्रेस
हमेशा पार्टी के साथ रहेंगे
हम कांग्रेस पार्टी के साथ डटकर खड़े हैं। भाजपा में शामिल नहीं होंगे। बलबीर सिंह सिद्धू व मेयर अमरजीत सिंह के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के फैसले से हैरान जरूर हैं लेकिन यह उनका निजी फैसला है। कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के समय में बहुत लोकभलाई के काम किए हैं। काफी संख्या में पार्षद कांग्रेस के साथ है। -जसप्रीत सिंह गिल, पार्षद एवं शहरी कांग्रेस के प्रधान