नयागांव/खरड़। पंजाब के सबसे बड़े हलकों की बात की जाए तो इनमें खरड़ सबसे अग्रणी है। राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से लेकर कई हस्तियों की रिहाइश इस हलके में है। लेकिन इसके बाद भी लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हलके को फ्लाईओवर के सिवाय कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला है। हालांकि राज्य सरकार ने कुछ समय पहले शिलान्यास किए हैं, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने में अभी समय लगेगा। पीने के पानी से लेकर बिजली तक का संकट लोगों पर भारी पड़ रहा है। इसके अलावा रियल एस्टेट माफिया कई लोग के सपने तोड़ चुका है। दूसरी ओर कई नामी निजी यूनिवर्सिटी इलाके में खुल गई हैं, लेकिन सरकारी कॉलेज अभी तक नहीं खुल पाया।
जानकारी के मुताबिक पूरे खरड़ विधानसभा हलके में खरड़, कुराली और नयागांव नगर काउंसिल आती है। न्यू चंडीगढ़ बिल्कुल एक अलग शहर बसाया जा रहा है। पूरे हलके में पीने के पानी की काफी किल्लत है। हलके के कई इलाकों मेें खासकर नयागांव में तो गर्मी तो दूर सर्दियों में भी लोगों को पानी के लिए लाइनों में लगना पड़ता है। 2017 विधानसभा चुनाव मे सभी पार्टियों के द्वारा कजौली वाटर प्रोजेक्ट को प्रमुखता से अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। लेकिन अभी तक हलके को यह पानी की सौगात नहीं मिल पाई है। इसके अलावा खरड़, न्यू चंडीगढ़, मुल्लांपुर और नयागांव शहर में बस अड्डे की समस्या भी काफी समय से चली आ रही है। इस पर भी राजनेताओं की ओर से हर बार चुनाव से पहले घोषणा की जाती है। लेकिन यह समस्या भी विधानसभा चुनाव-2022 में सभी पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल रहेगी। खरड़ में मौजूदा ट्रांसपोर्ट मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग ने दो दिसंबर को बस अड्डे का नींव पत्थर जरूर रखा है। नींव पत्थर के आलावा यहां पर अभी तक काम भी शुरू नहीं हो पाया है।
नयागांव में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और गारबेज कलेक्शन सेंटर की समस्या भी जस की तस है। इलाका शिवालिक की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां के ग्रामीण इलाकों में जानवरों द्वारा फसल को बर्बाद करने की समस्या का भी कोई समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों की ओर से समय-समय पर तारबंदी की मांग की जाती रही है। इसके अलावा अभी तक भी मोहाली की तरह कोई सामुदायिक केंद्र नहीं बन पाया है। यहां पर सफाई और गंदगी का बुरा हाल है।
कई गांवों में नहीं बस की सुविधा
हलके के कई गांवों में अभी तक बस की सुविधा नहीं है। जरूरत का सामान, इलाज करवाने और पढ़ाई के लिए गांव से लगभग 8-10 किलोमीटर दूर पैदल ही जाना पड़ता है। इस कारण कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है। - गंगा सिंह, निवासी गांव मिर्जापुर।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं बना
इलाके में आज तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लग पाया है। 2006 में नयागांव नगर काउंसिल बनी थी और तब से आज तक चुनावों के समय हर पार्टी की ओर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का वादा किया जाता है। लेकिन आज तक किसी ने इसको बनाने के लिए हिम्मत नहीं दिखाई
-गुरदीप सिंह, निवासी नयागांव।
सरकारी कॉलेज की सुविधा तक नहीं
इलाके के बच्चों को पढ़ाई के लिए मोहाली या चंडीगढ़ पर निर्भर रहना पड़ता है। हलके में कई निजी कॉलेजों के साथ निजी यूनिवर्सिटी तो खुली हैं, लेकिन सरकार की तरफ से उच्च शिक्षा के लिए एक भी कॉलेज नहीं खोला गया है। -कुलविंदर सिंह, निवासी खरड़।
रियल एस्टेट माफिया का डर
पूरे शहर में रियल स्टेट माफियाओं का आतंक है। हर तरफ निजी रिहायशी कॉलोनियां बनाई जा रही हैं। लेकिन सरकार की ओर से इलाके में एक सामुदायिक केंद्र तक का निर्माण भी नहीं कराया गया है। इस कारण इलाके के लोग मजबूरन निजी मैरिज पैलेसों पर निर्भर हैं। -अभिषेक पराशर, निवासी खरड़।
खरड़ हलके का विवरण
विधानसभा हलका खरड़ पंजाब का सबसे बड़ा हलका है। यहां पर कुल 2.61 लाख मतदाता हैं। इनमें 1.37 लाख पुरुष और 1.24 लाख महिलाएं हैं। इस हलके से आठ बार शिरोमणि अकाली दल, दस बार कांग्रेस, एक बार आजाद और एक बार आम आदमी पार्टी विजेता बनी। जबकि ‘आप’ की सीट पर जीते कंवर संधू हलके के विधायक हैं।
विधानसभा में मुद्दे उठाकर जगाया सरकार को
चंडीगढ़ की तर्ज पर खरड़ विधानसभा हलके को कजौली का पानी दिलवाने के लिए कई बार विधानसभा में आवाज उठाई गई है। कई मामले विधानसभा में उठाए हैं और इलाके के लोगों को सुविधाएं मिलीं। कई गांवों में अपने स्तर पर काम करवाए हैं। जिससे इलाके के बच्चों को पढ़ाई के लिए आनेजाने में सुविधा मिली है। कांग्रेस सरकार की ओर से विपक्षी विधायकों को ज्यादा काम करने ही नहीं दिया गया। -कंवर संधू, विधायक हलका खरड़।