जीरकपुर। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इंपीरियल गार्डन, पीरमुछल्ला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा के दूसरे दिन भागवताचार्य स्वामी डॉ. रमनीक कृष्ण ने श्रीशुकदेव के चरित्र का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि श्रीशुकदेव महान तपस्वी, ब्रह्मज्ञानी और वैराग्यवान संत थे। उनका जीवन सांसारिक मोह-माया से विरक्ति और परमात्मा की भक्ति का संदेश देता है। स्वामी रमनीक कृष्ण ने बताया कि राजा परीक्षित को अपने जीवन के अंतिम समय का ज्ञान हुआ। तब उन्होंने गंगा तट पर संतों की शरण ली। श्रीशुकदेव वहां पहुंचे और उन्हें श्रीमद्भागवत का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख नहीं है। इसका उद्देश्य भगवान का नाम-स्मरण, सत्संग, सेवा, सदाचार और भक्ति है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पंडाल जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।